Uttar Pradesh

Ground Report: कॉरिडोर नहीं चाहिए…वृंदावन के लोग बोले- 6 पीढ़ियों से हैं यहां, सरकार उजाड़ रही है हमारे आशियाने

मथुरा: तीर्थों की नगरी वृंदावन के हर गली से “राधे- राधे” की गूंज आती है. यहां पर इन दिनों माहौल भक्ति का नहीं बल्कि चिंता और डर का है. बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर बनने की खबर ने जैसे लोगों के सिर पर आफत ला दी है. कोर्ट की तरफ से निर्माण को हरी झंडी मिलते ही लोगों की नींद उड़ी हुई है. इन्हें अपना घर दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान लगता था, आज वही लोग बेघर हो जाने के डर से कांप रहे हैं.

जन्माष्टमी पर मच गई थी भगदड़
2022 की वह रात शायद ही कोई भूलेगा, जब जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बांके बिहारी मंदिर में भगदड़ मच गई थी. उस दिन मंदिर में भक्ति नहीं, चीख-पुकार सुनाई दी थी. हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय कमेटी गठित करवाई. रिपोर्ट के बाद सरकार ने कॉरिडोर निर्माण की योजना को आगे बढ़ाया. कोर्ट का आदेश भी आ गया. मगर इसके बाद जो हुआ, वह वृंदावन के लोगों के लिए किसी बुरे सपने जैसा है.

कॉरिडोर को लेकर गोस्वामी समाज और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं. जगह- जगह पोस्टर, बैनर, नारेबाजी और धरने चल रहे हैं. लोगों का कहना है कि उनके घर, उनकी गलियां, उनका जीवन यहां की मिट्टी में रचा- बसा है. अब जब सरकार कहती है कि इन मकानों को तोड़कर कॉरिडोर बनाया जाएगा, तो लोगों का कहना है कि हम कहां जाएंगे?

“यह घर नहीं, हमारी पहचान है”
लोकल18 की टीम जब वृंदावन पहुंची तो हर गली में चिंता का माहौल था. जिसके मकान कॉरिडोर के लिए चिन्हित किए गए हैं, उन्होंने अपना दर्द खुलकर साझा किया. यहां पर शिवकुमार मिश्र का परिवार 6 पीढ़ियों से रह रहा है. उन्होंने कहा, “ना अब खाना अच्छा लगता है, ना पानी. दिन- रात बस यही सोचते हैं कि हमारा क्या होगा. क्या सरकार को इतना भी एहसास नहीं कि ये सिर्फ घर नहीं, हमारी पहचान हैं?”

स्थानीय महिला मंजू अग्रवाल ने बताया, “सरकार सिर्फ हवा में बातें कर रही है. कह रही है कि सबको मुआवजा मिलेगा, लेकिन अयोध्या में क्या हुआ सब जानते हैं. यहां भी वही दोहराया जाएगा. किसी को कुछ नहीं मिलेगा. सिर्फ आशियाने टूटेंगे.”

वहीं, घेरा निवासी मुकेश अग्रवाल कहते हैं, “यहां की गलियों को चिन्हित कर लिया गया है. घरों पर नंबर लिख दिए गए हैं. दर्जनों गलियों की सूची बना ली गई है. हम कहां जाएं? कोई हमें यह नहीं बताता. बस एक तरफा आदेश मिल रहा है, घर खाली करो.”

भगवान बांके बिहारी से अलग करना है नामुमकिन
वृंदावन की जनता का कहना है कि उन्हें भगवान बांके बिहारी से अलग करना नामुमकिन है. लेकिन सरकार जिस तरह से मकानों को तोड़ने की योजना पर आगे बढ़ रही है. वह न सिर्फ संवेदनशीलता की कमी को दिखाता है, बल्कि धार्मिक नगरी के मूल स्वरूप को भी खतरे में डाल रहा है.

अब लोग हाथ जोड़कर सरकार से कह रहे हैं कि हम राधे कृष्ण के भक्त हैं, हमारा सब कुछ यहीं है. कॉरिडोर चाहिए तो बनाइए, लेकिन हमें उजाड़े बिना रास्ता निकालिए.

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