सौंफ शुद्ध देसी माउथ फ्रेशनर है और हमारे भारतीय रसोई का अहम ‘किरदार’ भी. मीठे से लेकर नमकीन व्यंजनों में इसका प्रयोग किया जाता है. यह आजकल की बात नहीं है बल्कि बरसों-बरस से पकवानों की जान है. ठंडी तासीर और सुगंधित स्वाद वाला सौंफ पाचन में लाभदायक है. अक्सर मेहमानों को खाने के बाद सौंफ परोसी जाती है. यह कोई लग्जरी नहीं है बल्कि हमारे पुरखों का बिना कहे दिया टिप है!तो बात यूं है कि यह वात, पित्त और कफ में संतुलन स्थापित कर शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा को बनाए रखता है. आयुर्वेद तो इसे महत्वपूर्ण औषधि मानता है, जो हजारों वर्ष से विभिन्न शारीरिक समस्याओं का उपचार करती आई है.
पाचन तंत्र सौंफ- गैस, अपच और पेट की ऐंठन को दूर करने में सहायक होती है. इसमें मौजूद आवश्यक तेल गैस्ट्रिक एंजाइम्स के स्राव को बढ़ावा देते हैं, जिससे भोजन सही तरीके से पचता है. एसिडिटी की समस्या को दूर करने में सौंफ बहुत फायदेमंद होती है. यह पेट को ठंडक प्रदान करता है. आयुर्वेद में डाइजेस्टिव सिस्टम यानी पाचन तंत्र को अग्नि कहा जाता है. माना जाता है कि अगर अग्नि मजबूत और संतुलित होती है, तो पाचन बेहतर रहता है. प्राचीन चिकित्सा पद्धति के मुताबिक हर बीमारी की जड़ में पेट संबंधी व्याधि होती है.
खांसी-जुकाम हरी छोटी या मोटी सी सौंफ पेट का ख्याल रखती है और फिर बाकी समस्याओं को भी संभाल लेती है. इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण खांसी, जुकाम और गले की खराश को ठीक करने में भी मदद करते हैं. इसका प्रयोग चाय या इसके काढ़े में किया जाए तो बंद नाक खुलती है. इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं.
तनावतनाव कम करने में भी इसकी सौंफ की छोटी सी मात्रा बड़ा रोल निभाती है. इसकी सुगंध मानसिक शांति प्रदान करती है और नींद को बेहतर बनाने में मदद करती है. अनिद्रा की समस्या में सौंफ की चाय या इसके अर्क का सेवन करने से गहरी और शांत नींद आती है.
इनपुट-आईएएनएस
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