महिलाओं में कैंसर के खतरों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, खासकर जब बात ओवेरियन कैंसर की हो. यह कैंसर महिलाओं के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है क्योंकि इसकी पहचान शुरुआती चरण में करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है. अमेरिकी कैंसर सोसायटी के अनुसार, केवल 20% मामलों में ही ओवेरियन कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो पाती है. अगर इसे जल्दी पकड़ लिया जाए तो 94% मरीज पांच साल से ज्यादा जीवित रह सकते हैं.
ओवेरियन कैंसर महिला प्रजनन तंत्र का हिस्सा हैं, जो महिलाओं के अंडाशय (ओवरी) में विकसित होता है. यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में यह अधिक पाया जाता है. अक्सर, इसके लक्षण शुरुआती चरण में अस्पष्ट होते हैं, जैसे पेट में सूजन, भूख न लगना या बार-बार पेशाब जाने की इच्छा. इसलिए, कई बार इसकी पहचान देर से होती है.
लक्षण* पेट में सूजन या भारीपन* पेट या पेल्विस में दर्द* जल्दी भूख लगने का अहसास या भूख न लगना* पेशाब करने की जल्दी महसूस होना* अपच या पेट खराब होना* कब्ज या दस्त* पीठ में दर्द* ज्यादा थकान* बिना वजह वजन कम होना* मेनोपॉज के बाद योनि से खून आना
ओवेरियन कैंसर के रिस्क फैक्टर* उम्र: 50 साल के बाद इसका खतरा बढ़ जाता है.* जीन में बदलाव: BRCA1 और BRCA2 जीन म्यूटेशन से ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ता है.* पारिवारिक इतिहास: परिवार में अगर किसी को ओवेरियन या ब्रेस्ट कैंसर हुआ है तो खतरा ज्यादा होता है.* शुरुआती मासिक धर्म या देर से मेनोपॉज भी खतरे को बढ़ा सकते हैं.
कैसे कम करें ओवेरियन कैंसर का खतरा?* धूम्रपान छोड़ें.* वजन कंट्रोल रखें.* अगर परिवार में यह कैंसर हुआ है तो डॉक्टर से परामर्श लें.
टेस्ट और इलाजओवेरियन कैंसर की पहचान के लिए आमतौर पर खून की जांच और स्कैनिंग की जाती है. इसका मुख्य इलाज सर्जरी और कीमोथैरेपी है. इलाज कैंसर की स्टेज, ग्रेड और मरीज की सेहत पर निर्भर करता है.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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