What is Reverse Swing: क्रिकेट की दुनिया इन दिनों बदलाव के दौर से गुजर रही है. नए-नए बॉलिंग एक्शन से लेकर नई टेक्निक भी देखने को मिलती हैं. लेकिन आज हम आपको बॉलिंग की ऐसी मास्टर टेक्निक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके सामने बड़े-बड़े धुरंधर बल्लेबाज पस्त दिखे हैं. ये है रिवर्स स्विंग, जिसकी मदद से दिग्गज गेंदबाजों ने मैच की काया तक पलटी है. आजकल के युवा गेंदबाजों में रिवर्स स्विंग सीखने की ललक दिखती है, लेकिन चुनिंदा बॉलर्स ही इस टेक्निक के मास्टर बन पाते हैं. आईए रिवर्स स्विंग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तत्यों पर नजर डालते हैं.
क्या होती है रिवर्स स्विंग?
रिवर्स स्विंग टेक्निक का इस्तेमाल बॉलर्स गेंद पुरानी होने के बाद करते हैं. इसमें बल्लेबाज ये भांप नहीं पाता कि गेंद किस दिशा में स्विंग करने वाली है. इन स्विंग के एक्शन से फेंकी गई बॉल बाहर की तरफ जाती है जबकि आउट स्विंग के एक्शन से गेंद अंदर की तरफ आती है. ऐसे में रिवर्स स्विंग से बल्लेबाज काफी परेशान रहते हैं. इससे बचने के लिए बल्लेबाज देरी से यानि गेंद टप्पा खाने के बाद और स्विंग होने के बाद शॉट को खेलते हैं, हाथ और एक्शन से इसे पढ़ना काफी मुश्किल होता है.
किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
रिवर्स स्विंग तेज गेंदबाजों के लिए ब्रह्मास्त्र है. इसकी मदद से ही 1992 वर्ल्ड कप में वसीम अकरम ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखा दिया. कई बार सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे दिग्गज भी बेबस नजर आए हैं. रिवर्स स्विंग सीखने से पहले पेसर्स को सबसे पहले सीखना होगा कि इसका इस्तेमाल कब और कहां करना चाहिए. नई गेंद से रिवर्स स्विंग की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि तब गेंद में इन स्विंग और आउट स्विंग करने में आसानी होती है. रिवर्स स्विंग को कराने के लिए गेंद के एक हिस्से को खुरदरा जबकि एक हिस्से को चिकना करना पड़ता है.
पुरानी बॉल की टेक्निक है रिवर्स स्विंग
रिवर्स स्विंग का इस्तेमाल तब होता है जब गेंद पुरानी होने के बाद स्विंग होना बंद हो जाती है. ऐसे में गेंदबाजों के लिए बैटर्स को आउट करना किसी चुनौती से कम नहीं होता. कप्तान बीच के ओवर्स में उस बॉलर को गेंद थमाता है जो गेंदबाज रिवर्स स्विंग का मास्टर है. 20-30 ओवर पुरानी गेंद हो जाने के बाद ही इस टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है.
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क्या है रिवर्स स्विंग का विज्ञान?
रिवर्स स्विंग के पीछे गजब का विज्ञान है. माना जाता है गेंद का जो हिस्सा चिकना होता है हवा के बहाव से उस पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जबकि खुरदुरा हिस्सा पर हवा का दबाव कम होता है. ऐसे में गेंदबाज किसी भी हिस्से के तरफ गेंद को पिच कराकर हवा का बहाव चिकने हिस्से पर दबाव देकर उसे स्विंग करा देता है.
कैसे फेंके रिवर्स स्विंग?
इन सब चीजों को जानने के बाद एक सवाल आप सभी के जहन में होगा कि रिवर्स स्विंग आखिर कैसे फेंकी जाती है. रिवर्स स्विंग कराने के लिए गेंदबाज बॉल की सीम या सिलाई पर अंगुलियों को रखकर हाथ को शरीर से दूर रखकर बॉलिंग करते हैं. यदि वह आउट स्विंग के एक्शन से गेंद फेंकेंगे तो बॉल इन स्विंग होगी और बल्लेबाज बड़ा शॉट नहीं खेल सकेगा. वहीं, इन स्विंग के एक्शन से खेली गई बॉल पिच करने के बाद बाहर की ओर जाएगी.
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