रिपोर्ट: अभिषेक जायसवाल
वाराणसी: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को लोलार्क छठ (Lolark Chhath) का पर्व मनाया जाता है. धर्म नगरी काशी में इस दिन माताएं सन्तान प्राप्ति की कामना से ऐतिहासिक लोलार्क कुंड में स्नान करती हैं. ऐसी मान्यता है कि जो भी दंपति यहां स्नान करते हैं, उनकी सूनी गोद भर जाती है. यही वजह है कि इस दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं. इस बार ये पर्व 2 सितम्बर को मनाया जाएगा. लोलार्क कुंड में स्नान के दौरान दंपति को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए यहां इस रिपोर्ट में…
वाराणसी के जाने माने विद्वान स्वामी कन्हैया महाराज ने बताया कि जिन विवाहित महिलाओं की गोद सूनी होती है, उन दंपति को लोलार्क छठ के दिन काशी के भदैनी स्थित लोलार्क कुंड में तीन बार डुबकी लगाकर स्नान करना चाहिए. कुंड में स्नान के बाद दंपति को एक फल का दान कुंड में करना चाहिए. इस दौरान दम्पति को अपने भीगे कपड़े भी यहीं छोड़ देना चाहिए. कुंड में स्नान के बाद दम्पति को लोलाकेश्वर महादेव का दर्शन करना चाहिए.
मनोकामना पूर्ति तक नहीं करना चाहिए फल का सेवनइसके साथ ही स्नान के दौरान दंपति जिस फल का दान कुंड में करते हैं, मनोकामना पूर्ति तक उसे उसका सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और स्नान करने वाली माताओं की सूनी गोद भर जाती है.
यह है कथापौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान सूर्य ने यहां सैकड़ों वर्ष तपस्या कर शिवलिंग की स्थापना की थी, जो लोलाकेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा एक कथा यह भी है कि इसी जगह पर भगवान सूर्य के रथ का पहिया गिरा था, जिसके कारण कुंड का निर्माण हुआ. बाद में रानी अहिल्याबाई ने इस कुंड का पुनः निर्माण कराया था.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: Uttar pradesh news, Varanasi newsFIRST PUBLISHED : September 01, 2022, 07:18 IST
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