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टीम इंडिया के सेलेक्शन में हुई ये 5 बड़ी चूक, इंग्लैंड दौरे पर 5-0 से टेस्ट सीरीज हारने का खतरा



इंग्लैंड के दौरे पर टीम इंडिया की बड़ी अग्निपरीक्षा होगी. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की सेलेक्शन कमिटी ने इंग्लैंड के खिलाफ 20 जून से शुरू होने वाली पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान कर दिया है. शुभमन गिल को भारत का नया टेस्ट कप्तान बनाया गया है. इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया के सेलेक्शन में हेड कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर का बड़ा रोल रहा है. टीम इंडिया के सेलेक्शन में 5 बड़ी चूक हुई है, जिससे शुभमन गिल की टीम पर इंग्लैंड में 5-0 से टेस्ट सीरीज हारने का खतरा मंडरा रहा है.
1. श्रेयस अय्यर को मौका नहीं देना
विराट कोहली के संन्यास के बाद भारतीय टेस्ट टीम में नंबर-4 की बैटिंग पोजीशन के लिए एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी, जिसमें कोई एक्स फैक्टर वाली बात हो. श्रेयस अय्यर में वह एक्स फैक्टर था, लेकिन सेलेक्टर्स ने इस टैलेंटेड बल्लेबाज को इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए काबिल नहीं समझा. श्रेयस अय्यर मिडिल ऑर्डर के बहुत टैलेंटेड बल्लेबाज हैं, जो तेज गेंदबाज और स्पिनरों को बहुत बेहतरीन तरीके से खेलते हैं. श्रेयस अय्यर का अनुभव इंग्लैंड के मुश्किल हालात में टीम इंडिया के बहुत काम आता, लेकिन टीम मैनेजमेंट को कुछ और ही मंजूर है. श्रेयस अय्यर भारत के सबसे लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में से एक रहे हैं. भारत की 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीत में श्रेयस अय्यर 243 रनों के साथ टीम के टॉप स्कोरर थे. श्रेयस अय्यर ने 2024-25 रणजी ट्रॉफी सीजन में अच्छा प्रदर्शन किया था. श्रेयस अय्यर ने रणजी ट्रॉफी के पांच मैचों में दो शतकों के साथ 68.57 की औसत से 480 रन बनाए थे. इसके बावजूद श्रेयस अय्यर को इंग्लैंड दौरे पर जाने वाली टीम इंडिया में शामिल नहीं किया गया. श्रेयस अय्यर ने अपना आखिरी टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ 2 फरवरी 2024 को खेला था. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इस बल्लेबाज के गजब के रिकॉर्ड्स हैं. श्रेयस अय्यर ने 81 फर्स्ट क्लास मैचों में 6363 रन बनाए हैं. श्रेयस अय्यर ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 15 शतक और 33 अर्धशतक ठोके हैं. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में श्रेयस अय्यर का बेस्ट स्कोर 233 रन है. श्रेयस अय्यर ने टीम इंडिया के लिए 14 टेस्ट मैचों में 811 रन बनाए हैं. श्रेयस अय्यर ने टेस्ट में 1 शतक और 5 अर्धशतक जड़े हैं.
2. मोहम्मद शमी को टीम से बाहर करना
इंग्लैंड की पिचों पर जहां गेंद स्विंग और सीम करती है, ऐसे हालात को देखते हुए भी BCCI के सेलेक्टर्स ने मोहम्मद शमी जैसे खतरनाक तेज गेंदबाज को नहीं चुना. मोहम्मद शमी का इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया में नहीं होना सबसे बड़ा नुकसान साबित होगा. मोहम्मद शमी ने इंग्लैंड की धरती पर 14 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 42 विकेट चटकाए हैं. मोहम्मद शमी गेंद को तेजी के साथ हवा में मूव कराने का यूनिक टैलेंट रखते हैं. इंग्लैंड में ड्यूक गेंद से गेंदबाजी होती है. ड्यूक गेंद को खेलना कूकाबूरा और एसजी की तुलना में बहुत मुश्किल होता है. मोहम्मद शमी ड्यूक गेंद का इस्तेमाल कर घातक तरीके से शिकार करने में माहिर हैं. फिटनेस का हवाला देते हुए सेलेक्टर्स ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज से मोहम्मद शमी को बाहर कर दिया. मोहम्मद शमी ने भारत के लिए 64 टेस्ट मैचों में 229 विकेट झटके हैं. मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट में 6 बार पारी में 5 विकेट चटकाने का कारनामा किया हुआ है.
3. अनुभवी बल्लेबाजों को नजरअंदाज करना
केएल राहुल को छोड़कर भारत के पास कोई भी ज्यादा अनुभवी बल्लेबाज नहीं हैं, जो इंग्लैंड के मुश्किल हालात में स्विंग लेती गेंदों के सामने टिककर बल्लेबाजी कर सके. इंग्लैंड के खिलाफ इस बड़ी टेस्ट सीरीज के लिए अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा जैसे अनुभवी बल्लेबाजों की जरूरत थी. सेलेक्शन कमिटी ने अपने फैसलों से टीम इंडिया को जोखिम में डाल दिया है. इंग्लैंड दौरे के लिए चुनी गई भारतीय टेस्ट टीम में ज्यादातर स्ट्रोक खेलने वाले बल्लेबाज हैं. करूण नायर 8 साल बाद टेस्ट टीम में लौटे हैं, लेकिन उनसे इंग्लैंड दौरे पर अचानक किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती है. भारत में सपाट पिचों पर घरेलू क्रिकेट खेलने और इंग्लैंड में ग्रीन टॉप पिचों पर टेस्ट मैच खेलने में जमीन और आसमान का अंतर है. केएल राहुल को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज ऐसा नहीं है, जो इंग्लैंड में जरूरत पड़ने पर भारत के लिए मजबूत डिफेंस के सहारे पिच पर घंटों खड़ा रह सके. इंग्लैंड के खिलाफ इस टेस्ट सीरीज में ऐसे भी मौके आएंगे, जब टीम इंडिया को मैच ड्रॉ कराने की जरूरत भी पड़ेगी. ऐसे मुश्किल हालात में टीम इंडिया को अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा जैसे अनुभवी बल्लेबाजों की कमी महसूस होगी, जिन्हें सेलेक्टर्स ने नजरअंदाज कर दिया.
4. शुभमन गिल को टेस्ट कप्तान बनाने में जल्दबाजी करना
शुभमन गिल को अचानक टेस्ट कप्तान बनाकर भारतीय टीम मैनेजमेंट ने जल्दबाजी कर दी है. यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या शुभमन गिल भारत के अगले टेस्ट कप्तान बनने के लायक हैं. भारतीय टीम मैनेजमेंट जसप्रीत बुमराह को टेस्ट कप्तान बना सकती थी और शुभमन गिल को उपकप्तानी देकर और भी ग्रूम करने का समय दे सकती थी. इंग्लैंड के खिलाफ इस हाई प्रोफाइल टेस्ट सीरीज में दबाव अपने ऊंचे स्तर पर होगा. ऐसे में शुभमन गिल को टेस्ट कप्तान बनाने का फैसला टीम इंडिया पर बैकफायर भी कर सकता है. इंग्लैंड में शुभमन गिल का बल्लेबाजी औसत 15 से भी नीचे है. शुभमन गिल ने इंग्लैंड में अभी तक 3 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 14.66 की घटिया औसत से सिर्फ 88 रन ही बनाए हैं. शुभमन गिल ने किसी भी SENA देश (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में एक भी शतक नहीं ठोका है. ये भी तय नहीं है कि शुभमन गिल टेस्ट टीम में ज्यादा वक्त तक टिक पाएंगे या नहीं. विदेशी धरती पर शुभमन गिल का बैटिंग औसत बहुत खराब है. विदेशी धरती पर शुभमन गिल के बल्ले से महज 29.50 की औसत से रन निकले हैं. ऐसे में शुभमन गिल को कप्तान बनाने का फैसला उल्टा टीम इंडिया को भारी पड़ सकता है. शुभमन गिल ने अब तक SENA देशों और वेस्टइंडीज में खेले गए 13 टेस्ट मैचों में 559 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत सिर्फ 25 रहा है. शुभमन गिल ने इस दौरान 24 पारियों में सिर्फ दो अर्धशतक लगाए हैं. साल 2021 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन टेस्ट में 91 रन की मैच जिताऊ पारी खेलने के बाद से शुभमन गिल का बल्ला SENA देशों में खामोश रहा है. शुभमन गिल की बात करें तो उन्होंने 32 टेस्ट मैचों में 35.06 की औसत से 1893 रन बनाए हैं. शुभमन गिल ने अपने टेस्ट करियर में 5 शतक और 7 अर्धशतक ठोके हैं. टेस्ट क्रिकेट में शुभमन गिल का हाईएस्ट स्कोर 128 रन है. शुभमन गिल ने अपने टेस्ट करियर में अभी तक एक भी दोहरा शतक नहीं जमाया है.
5. अक्षर पटेल की जगह फ्लॉप जडेजा को मौका देना
अक्षर पटेल जैसे टैलेंटेड लेफ्ट आर्म स्पिन ऑलराउंडर को इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए नहीं चुना गया है. अक्षर पटेल की जगह सेलेक्टर्स ने रवींद्र जडेजा को मौका दिया है, जिनके फॉर्म पर सवाल है. रवींद्र जडेजा के मुकाबले अक्षर पटेल बेहतर स्पिनर और विस्फोटक बल्लेबाज हैं. विदेशी धरती पर रवींद्र जडेजा का गेंदबाजी में बहुत खराब रिकॉर्ड है. ऑस्ट्रलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज (2024-25) के दौरान रवींद्र जडेजा तीन टेस्ट मैचों में केवल 4 विकेट ही हासिल कर पाए थे. वहीं, बल्ले से उन्होंने 3 टेस्ट मैचों में केवल 120 रन ही बनाए थे. अगर भारतीय टीम मैनेजमेंट भविष्य को ध्यान में रखकर ही टेस्ट टीम चाहती थी तो रवींद्र जडेजा की जगह युवा अक्षर पटेल को मौका दिया जाना था. कुल मिलाकर टीम इंडिया के सेलेक्शन में ऐसे ही बड़े ब्लंडर हुए हैं, जिसके कारण उसे इंग्लैंड की धरती पर टेस्ट सीरीज में 5-0 से हार का सामना करना पड़ सकता है.



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