Uttar Pradesh

साल में सिर्फ एक बार सजता है ये स्वर्ग सा दरबार, फूलों की महक और जयकारों से गूंज उठा मथुरा, देखिए अलौकिक नज़ारा!

मथुरा: मथुरा के श्री रंगनाथ मंदिर में इस बार फिर आस्था का सैलाब देखने को मिला है. श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम में रंगे भक्तों ने जब अपने आराध्य ठाकुर गोदारंगमन्नार को फूलों से सजे भव्य बंगले में विराजित देखा, तो मानो सब कुछ थम सा गया. यह दृश्य साल में सिर्फ एक बार देखने को मिलता है, जब श्री वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिर में फूलों का विशाल बंगला सजाया जाता है.ठाकुर जी को गर्मी से राहत देने की परंपरा
गर्मियों के मौसम में ठाकुर जी को शीतलता देने के उद्देश्य से मंदिर में यह विशेष आयोजन किया जाता है. इस बार भी मंदिर को फूलों की अनुपम सजावट से सजाया गया. ठाकुर जी अपने परिकर सहित उसमें विराजमान हुए. मंदिर परिसर में कदम रखते ही फूलों की सुगंध, संगीत की मधुरता और भक्तों की जयकार गूंजने लगी.

वृंदावन की पारंपरिक लीलाओं को ध्यान में रखकर इस फूल बंगले को सजाया गया था. भगवान रंगनाथ को फूलों से ऐसा सुसज्जित किया गया था, मानो वो लताओं और कुंजों में सजीव होकर लीलाएं कर रहे हों.

कलाकारों की अनोखी कलाकारी बनी आकर्षण
फूल बंगले को खास बनाने के लिए जाने-माने कलाकार जुगल किशोर शर्मा और उनकी टीम ने मेहनत की. केले के पत्तों पर श्री वैष्णव संप्रदाय के संतों की छवियों को उकेरा गया, जिसने सभी का ध्यान खींचा. केले के तनों पर की गई कलाकारी और सरोवर में बनाई गई कृत्रिम यमुना, नाव और गोवर्धन पर्वत की झांकी बेहद आकर्षक थी.

भगवान गोदा जी और उनके परिकर सहित ठाकुर जी की छवि ऐसी लग रही थी जैसे वो भक्तों से सीधे संवाद कर रहे हों. भक्तों ने कहा कि ऐसा दर्शन वर्षों में एक बार ही मिलता है.

भक्तों का उमड़ा सैलाब
फूल बंगले के खुलते ही मंदिर परिसर जय श्री रंगनाथ के जयकारों से गूंज उठा. स्वर्ण गरुड़ स्तंभ परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. दूर-दूर से आए श्रद्धालु इस अद्भुत दर्शन के लिए घंटों लाइन में खड़े दिखे.

जयपुर से आई श्रद्धालु शालू शर्मा ने कहा, “जैसे हमें गर्मी लगती है वैसे भगवान को भी राहत की जरूरत होती है. इस फूल बंगले ने मंदिर में शीतलता ला दी और भक्तों को आनंदित कर दिया.”

यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच भावनात्मक जुड़ाव का जीवंत प्रमाण है. मथुरा के श्री रंगनाथ मंदिर में साल में एक बार सजने वाला यह फूल बंगला आस्था, कला और परंपरा का सुंदर संगम पेश करता है.

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