Last Updated:June 09, 2025, 15:51 ISTFarming of gourd with Machan method: गोंडा- सीमित शिक्षा और साधनों के बावजूद मेहनत और नवाचार की बदौलत एक किसान लाखों की कमाई कर रहा है. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के प्रगतिशील किसान शेषराम शुक्ला ने मचान विधि से सब्जी की खेती को अपनाकर अपने खेतों को आमदनी का हरा-भरा स्रोत बना लिया है. शेषराम शुक्ला ने आठवीं तक की पढ़ाई के बाद खेती को ही अपनी किस्मत बनाने का फैसला लिया. उनका कहना है कि बचपन से ही खेती में रुचि थी, और अब उसी शौक को उन्होंने अपना पेशा बना लिया है. वर्तमान में वे लौकी, पालक और बोड़ा की खेती कर रहे हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान शेषराम बताते हैं कि मचान विधि अपनाने का विचार उन्हें उद्यान विभाग और पानी संस्थान से मिला. मचान विधि में बेल वाली फसलों को जमीन से ऊपर जाली या बांस की संरचना पर चढ़ाया जाता है, जिससे फसलें साफ-सुथरी और रोग रहित रहती हैं. उन्होंने बताया कि इस विधि से लौकी की पैदावार अधिक होती है और सब्जी की गुणवत्ता बेहतर होती है. शेषराम शुक्ला ने जनवरी माह में लौकी की नर्सरी तैयार की और फरवरी में पौधों को खेत में लगाया. मचान पर बेल चढ़ाने के बाद उन्होंने बची हुई जमीन पर प्याज और धनिया की भी बुवाई की. सभी बीज उद्यान विभाग की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराए गए. शेषराम बताते हैं कि वे एक बीघा भूमि में लौकी की खेती कर रहे हैं, जहां से रोजाना 3 से 4 कुंतल तक लौकी की तुड़ाई होती है. शुरू में लौकी 15–20 रुपये प्रति किलो तक बिकी, अब बाजार के अनुसार रेट में उतार-चढ़ाव होता है. लौकी की बिक्री से शेषराम की रोज़ाना आमदनी 6000 से 8000 रुपये तक हो रही है. उनका कहना है कि लौकी की खेती ने उन्हें सालाना लाखों रुपये का टर्नओवर देने में मदद की है. लौकी के साथ-साथ दूसरी सब्जियां भी उनके इनकम में इजाफा कर रही हैं. शेषराम के अनुसार लौकी की फसल लगभग 7 से 8 महीने तक चलती है, जिससे पूरे साल स्थिर आमदनी सुनिश्चित हो जाती है. उनका मानना है कि यदि किसान मचान विधि जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो कम जमीन में भी बेहतर लाभ कमाया जा सकता है.homeagricultureकिसान को मालामाल कर रही ‘मचान’ वाली लौकी, रोजाना 8 हजार तक हो रही कमाई
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