Uttar Pradesh

जर्मनी की मंदी: अमेरिकी टैरिफ के बाद जर्मनी पर मार, चमड़े का कारोबार मंदी की आहट से थमा – उत्तर प्रदेश समाचार

उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. पहले अमेरिका के बढ़े टैरिफ ने कारोबार की रफ्तार धीमी की, अब जर्मनी की मंदी ने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. लेदर, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर में ऑर्डर घटने से कारोबार सुस्त पड़ गया है. अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले महीनों में निर्यात पर और दबाव बढ़ सकता है.

उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए यह साल चुनौतियों से भरा साबित हो रहा है. गौरतलब है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ में किसी भी तरह की राहत न मिलने से कारोबार पर बुरा असर पड़ा है. पहले जहां अमेरिकी बाजार से सबसे अधिक ऑर्डर मिलते थे, अब वहां से मांग में भारी गिरावट देखी जा रही है. बढ़े हुए टैरिफ के कारण भारतीय उत्पाद महंगे हो गए हैं, जिससे लेदर, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

अमेरिका की चुनौतियों के बीच अब जर्मनी की मंदी ने भी निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. यूरोप के सबसे बड़े बाजारों में से एक जर्मनी में मांग में आई भारी गिरावट ने कारोबार की रफ्तार धीमी कर दी है. पहले जहां वहां से लगातार ऑर्डर मिलते थे, अब आर्थिक सुस्ती के कारण कंपनियों ने नए सौदे रोक दिए हैं. कानपुर का लेदर और हैंडीक्राफ्ट उद्योग इस असर को सबसे ज्यादा झेल रहा है.

थम गई एक्सपोर्ट की रफ्तार
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024-25 में अप्रैल से जुलाई तक यूपी से 3460 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जबकि 2025-26 की इसी अवधि में यह केवल 3640 करोड़ रुपये तक पहुंच सका. यानी महज 180 करोड़ रुपये की मामूली बढ़ोतरी. जबकि पहले हर तिमाही में औसतन 500 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज होती थी.

बढ़ सकता है निर्यातकों पर दबाव
कानपुर की लेदर कारोबारी प्रेरणा वर्मा का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ और जर्मनी की मंदी दोनों ने मिलकर कारोबार को बड़ा झटका दिया है. अब व्यापारियों को एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों में नए अवसर तलाशने होंगे. आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि अमेरिका और जर्मनी लंबे समय से प्रमुख निर्यात बाजार रहे हैं, लेकिन इस बार दोनों ओर से सुस्ती ने चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में यूपी के निर्यात पर और दबाव बढ़ सकता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ना तय है.

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