Uttar Pradesh

गाजियाबाद की इस फैक्ट्री में बनती हैं हाईटेक बैटरियां, हर महीने तैयार होती हैं 6000 यूनिट, जानिए कैसे बनता है एक बैटरी

लिथियम बैटरी तो आपने गाड़ी, स्कूटर या ई-रिक्शा में जरूर देखी होगी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये बैटरी आखिर बनती कैसे है? आज हम आपको लेकर चलेंगे गाजियाबाद के बुलंदशहर इंडस्ट्रियल एरिया की मैक्सवोल्ट एनर्जी इंडस्ट्रीज लिमिटेड में जहां हर महीने हजारों बैटरियां तैयार होती हैं. लोकल 18 की टीम जब इस फैक्ट्री में पहुंची. कैमरे में कैद हुई लिथियम बैटरी बनने की एक-एक स्टेप.

लिथियम बैटरी की पूरी कहानी शुरू सेल से होती है. यह सेल बैटरी का सबसे जरूरी हिस्सा होता है, ठीक वैसे ही जैसे इंसान के शरीर में दिल. सबसे पहले हर सेल को एक खास मशीन में डालकर उसकी जांच की जाती है कि वो सही तरीके से काम नहीं कर रहा है.अगर सेल में कोई कमी पाई जाती है. उसे अलग कर दिया जाता है.

इंस्टॉलेशन पेस्टिंग और शॉर्टिंग टेस्ट
जांच के बाद ये सेल इंस्टॉलेशन पेस्टिंग मशीन में भेजा जाता है. यहां पर इनसे जुड़ा जरूरी पेस्ट तैयार किया जाता है. इसके बाद आता है सेल शॉर्टिंग मशीन, जो यह सुनिश्चित करती है कि किसी दो सेल के बीच कोई शॉर्ट सर्किट तो नहीं हो रहा है. यह एक बेहद जरूरी स्टेप होता है. क्योंकि बैटरी की सुरक्षा इसी पर निर्भर करती है.

सेल होल्डिंग और वेल्डिंगइसके बाद इन सेल्स को सेल होल्डिंग स्टेशन में रखा जाता है. जहां उन्हें एक तय क्रम और साइज में व्यवस्थित किया जाता है. फिर आता है स्पॉट वेल्डिंग का काम, जहां सेल्स को तारों और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट से जोड़ा जाता है. इस प्रोसेस में छोटी-छोटी चिंगारियां भी निकलती हैं. लेकिन सुरक्षा के पूरे इंतजाम रहते हैं.

अब आता है सबसे अहम स्टेप – पैक होल्डरिंग
पैक होल्डरिंग यानी बैटरी को मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित कवर में बंद करना. यही वो कवर होता है जो बैटरी को झटकों, गर्मी, नमी और बाहर की हर स्थिति से बचाता है. इस प्रक्रिया के बाद बैटरी की फाइनल टेस्टिंग होती है और फिर उसे पैक कर दिया जाता है.

हर महीने बनती हैं 6000 बैटरियांमैक्सवोल्ट एनर्जी की इस यूनिट में हर महीने करीब 6000 बैटरियां तैयार की जाती हैं. यहां 25 से 30 तरह की बैटरियां बनाई जाती हैं. सबसे ज्यादा मांग उन बैटरियों की होती है जो स्कूटर, ई-साइकिल और ई-रिक्शा में इस्तेमाल होती हैं.

107 करोड़ का टर्नओवर, भविष्य लिथियम काकंपनी का पिछले साल का टर्नओवर 107 करोड़ रुपये रहा है। ये आंकड़ा बताता है कि लिथियम बैटरी का बाजार कितनी तेजी से बढ़ रहा है. आने वाला वक्त पूरी तरह इलेक्ट्रिक गाड़ियों का है. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और प्रदूषण को देखते हुए अब इलेक्ट्रिक वाहन ही भविष्य हैं और इनमें सबसे अहम रोल लिथियम बैटरी का है.

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