खेल हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ये हमें स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और तनाव कम करने में भी सहायक होते हैं. लेकिन खेलों के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े होते हैं. इनमें से सबसे बड़ा खतरा है चोट लगने का.
दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल में सीनियर डायरेक्टर एंड एचओडी (हड्डी रोग एवं ज्वाइंट रिप्लेशमेंट) डॉ. (प्रो.) अमिते पंकज अग्रवाल ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि लोग खेलों में इतने ज्यादा मग्न हो जाते हैं कि वे अपनी सुरक्षा की अनदेखी कर देते हैं. इसका परिणाम होता है चोटें. इस लेख में हम आपको कुछ आम खेल चोटों के बारे में बताएंगे, जिससे आप सावधान रह सकें.
स्प्रेन और स्ट्रेनस्प्रेन और स्ट्रेन सबसे आम खेल चोटों में से हैं. स्प्रेन तब होता है जब जोड़ों को जोड़ने वाली लिगामेंट्स खिंच जाती हैं या टूट जाती हैं. अक्सर यह चोट टखने में लगती है. वहीं स्ट्रेन तब होता है जब मांसपेशियां या टेंडन खिंच जाते हैं या टूट जाते हैं. इन चोटों से बचने के लिए वार्म-अप करना बहुत जरूरी है.
घुटने की चोटेंघुटने की चोटें भी काफी आम हैं, खासकर उन खेलों में जहां दौड़ना, कूदना और अचानक दिशा बदलना शामिल होता है. इसमें सबसे ज्यादा खतरा होता है एसीएल (एंटीरियर क्रुसीएट लिगामेंट) के टूटने का. यह चोट फुटबॉल, बास्केटबॉल और स्कीइंग जैसे खेलों में ज्यादा होती है. इसके अलावा घुटने में मौजूद कार्टिलेज भी प्रभावित हो सकता है, जिससे दर्द, सूजन और गतिशीलता में कमी आ सकती है.
हड्डी का फ्रैक्चरहड्डी का टूटना यानी फ्रैक्चर भी खेलों में आम चोट है. यह हाई इम्पैक्ट खेलों जैसे फुटबॉल, हॉकी और जिमनास्टिक में ज्यादा होता है. कलाई, हाथ, पैर और कोलरबोन में फ्रैक्चर होने की ज्यादा संभावना होती है. इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
जोड़ों का खिसकनाजोड़ों का खिसकना भी एक आम खेल चोट है. यह ज्यादातर फुटबॉल और बास्केटबॉल जैसे खेलों में होता है. कंधे का जोड़ सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, लेकिन उंगलियां, घुटने और कूल्हे भी प्रभावित हो सकते हैं. जोड़ों के खिसकने पर तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए.
टेनिस एल्बोटेनिस एल्बो एक तरह की ओवरयूज इंजरी है जो कोहनी के बाहरी हिस्से में दर्द पैदा करती है. यह सिर्फ टेनिस खिलाड़ियों को ही नहीं बल्कि गोल्फ, वेटलिफ्टिंग आदि खेलों में शामिल लोगों को भी हो सकती है.
शिन स्प्लिंट्सशिन स्प्लिंट्स टांग की हड्डी में दर्द की समस्या है. यह ज्यादातर धावकों को होती है, खासकर उन लोगों को जो ज्यादा दौड़ते हैं या अचानक से दौड़ने की दूरी बढ़ा देते हैं.
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