फैटी लिवर डिजीज एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है. जब लिवर में अधिक मात्रा में चर्बी जमा हो जाती है, तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है. अगर इसे समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह लिवर की सूजन (हेपेटाइटिस) और लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. खासतौर पर ग्रेड-2 फैटी लिवर के मरीजों को अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
ग्रेड 2 फैटी लिवर वह अवस्था है, जब लिवर में चर्बी की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है और यह अल्ट्रासाउंड में साफ दिखने लगता है. इस स्थिति में लिवर की काम करने की झमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है. यह स्थिति असंतुलित खानपान, मोटापा, शराब का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण होती है.
इन चीजों से करें परहेज:
शराब: शराब फैटी लिवर के सबसे बड़े कारणों में से एक है. यह लिवर को और अधिक नुकसान पहुंचाती है. ग्रेड 2 में शराब पूरी तरह छोड़ देना चाहिए.
तला-भुना और जंक फूड: बर्गर, पिज्जा, समोसा जैसे तले-भुने और जंक फूड में मौजूद ट्रांस फैट लिवर पर अधिक चर्बी जमा करते हैं. इसे पूरी तरह से खाने से बचें.
मिठाइयां और शुगर ड्रिंक: शुगर और फिजी ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन लिवर को और नुकसान पहुंचा सकता है. खासतौर पर डिब्बाबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक और केक से बचें.
रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड: रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड लिवर पर दबाव बढ़ाते हैं. इन्हें डाइट से निकालना जरूरी है.
ज्यादा नमक: ज्यादा नमक लिवर की सूजन बढ़ा सकता है. अपने खाने में कम नमक का उपयोग करें.
क्या खाएं?* हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, और होल ग्रेन्स.* लीन प्रोटीन जैसे अंडा सफेद भाग और दालें.* हेल्दी फैट्स जैसे नट्स और बीज.* लिवर को डिटॉक्स करने के लिए पर्याप्त पानी पिएं.
डॉक्टर की सलाह जरूरीग्रेड 2 फैटी लिवर के मरीजों को नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और लिवर फंक्शन टेस्ट करवाना चाहिए. इसके साथ-साथ नियमित व्यायाम और वजन घटाना भी जरूरी है.
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