Uttar Pradesh

अगर इंदिरापुरम में लिया है फ्लैट, तो तैयार रखें मोटा पैसा, GDA भेजने वाला है अतिरिक्त वसूली का नोटिस, जानिए पूरा मामला

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में घर या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे हैं? तो अपनी जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के समीकरण बदल दिए हैं। कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजे की राशि को 2014 के बजाय 2020 के सर्किल रेट पर देने का आदेश दिया है।

इस फैसले के बाद इंदिरापुरम विस्तार योजना में फ्लैट और प्लॉट की कीमतें आसमान छूने वाली हैं। किसानों की जीत, खरीदारों पर बढ़ा बोझ। इंदिरापुरम विस्तार योजना के तहत कनवानी गांव में जमीन अधिग्रहण को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। किसान अपनी जमीन को अधिग्रहण मुक्त करने की मांग कर रहे थे ताकि वहां हो चुके निर्माण सुरक्षित रह सकें। हालांकि, कोर्ट ने विकास की आवश्यकता को देखते हुए अधिग्रहण रद्द करने से तो मना कर दिया, लेकिन किसानों को बड़ी आर्थिक राहत दी है।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसानों को अब साल 2020 के सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा मिलेगा। इससे पहले जीडीए 2014 की दरों पर करीब 345 करोड़ रुपये देने की तैयारी में था, लेकिन अब यह बोझ बढ़कर 500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। जीडीए पर अचानक आए इस 500 करोड़ के अतिरिक्त बोझ की भरपाई सीधे तौर पर खरीदारों से की जाएगी। जिन लोगों को पहले ही प्लॉट या फ्लैट आवंटित किए जा चुके हैं (करीब 150 से ज्यादा आवंटी), उन्हें अब बढ़ा हुआ पैसा देने का नोटिस जारी किया जाएगा।

इतना ही नहीं, नई स्कीमों में हाई-राइज सोसायटियों और प्लॉट के रेट लगभग दोगुने हो सकते हैं। क्योंकि यह इलाका दिल्ली-एनसीआर का सबसे प्राइम हब माना जाता है, इसलिए जीडीए इसे किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता। अवैध निर्माणों और बैंक्वेट हॉल पर चलेगा बुलडोजर। कनवानी के इस विवादित क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो चुके हैं। यहां कई आलीशान बैंक्वेट हॉल, दुकानें और रिहायशी मकान बन चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अब अधिग्रहण को हरी झंडी दे दी है, जिसका सीधा मतलब है कि जीडीए अब इन सभी निर्माणों को ध्वस्त कर जमीन का कब्जा लेगा। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ करना और कब्जा लेना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को निपटाने के लिए अधिकतम 6 महीने का समय दिया है।

जीडीए उपाध्यक्ष का बयान। जीडीए के उपाध्यक्ष (वीसी) नंदकिशोर कलाल के अनुसार, ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कोर्ट ने 2020 के हिसाब से मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है, जिसके लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।’

खरीदारों के लिए क्या है इसका मतलब? निवेशकों के लिए झटका: जो लोग कम कीमत पर निवेश की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें अब भारी प्रीमियम देना होगा। खत्म हुआ कानूनी विवाद: भले ही कीमतें बढ़ गई हों, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इस जमीन पर किसी भी तरह का कानूनी विवाद खत्म हो गया है, जिससे भविष्य में खरीदारों को मालिकाना हक मिलने में आसानी होगी। सर्किल रेट का प्रभाव: 2020 का सर्किल रेट लागू होने से किसानों को वर्तमान बाजार भाव के करीब दाम मिलेगा, जो एक न्यायपूर्ण कदम है।

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