Uttar Pradesh

अब भूकंप से बचाएगा गन्ना, नोएडा वालों ने निकाला तोड़, ये ईंटें आग से भी सुरक्षित, गर्मी में कूल, सर्दी भी रहेगी दूर

Last Updated:July 15, 2025, 23:53 ISTNoida News : क्या आपने कभी सोचा कि जिस गन्ना का जूस आप पीते हैं, उसके कचरे से भी कोई स्ट्रक्चर बनाया जा सकता है. नोएडा में ऐसा ही हुआ है. कहा जा रहा है कि ये अपनी तरह दुनिया का पहला क्लासरूम है.नोएडा. यूपी के नोएडा ने कमाल कर दिखाया है. अब तक फेंक दिया जाने वाला कचरा सुर्खियों में है. यहां गन्ना के वेस्ट से एक स्कूल का क्लासरूम खड़ा कर दिया गया. कहा जा रहा है कि ये अपनी तरह का देश का ही नहीं, बल्कि दुनिया का पहला क्लासरूम है. इसे नोएडा सेक्टर-91 स्थित पंचशील बालक इंटर कॉलेज में बनाया गया है. दावा है कि ये क्लासरूम भूकंप, प्रदूषण, टर्माइड, सर्दी, गर्मी बरसात से बचाएगा. इसमें करीब गन्ने के कचरे से बनी 3500 ईंटों का इस्तेमाल किया गया है. ये सस्टेनेबिलिटी का एक उदाहरण है. अगर ये ट्रायल में सफल होता है तो ऐसे और भी क्लासरूम बनाए जाएंगे.

लंदन कर रहा मदद

लोकल 18 से बातचीत में स्कूल टीचर कविता सक्सेना ने बताया कि SUGARCRETE नाम की ये ईंटें गन्ने की पेराई के बाद बचने वाले वेस्टेज से तैयार की गई हैं. इन ईंटों की खासियत है कि ये भूकंप-रोधी, आग से सुरक्षित, टर्माइट प्रूफ और सामान्य ईंटों के मुकाबले हल्की और सस्ती हैं. इस एक क्लासरूम को बनाने में करीब 3500 SUGARCRETE ईंटों का उपयोग हुआ है. यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन और केमिकल सिस्टम्स टेक्नोलॉजी और पंचशील बालक इंटर कॉलेज के कोलेबोरेशन से इसका निर्माण कराया गया है. यह प्रयोग पूरी दुनिया में पहली बार यूपी के नोएडा में किया गया है.

100 साल इसकी उम्र

इस खास क्लासरूम के अंदर और बाहर के तापमान में भी साफ अंतर देखा जाता है. जहां बाहर गर्मी तेज महसूस होती है, वहीं अंदर तापमान कुछ हद तक ठंडा रहता है. इतना ही नहीं, क्लासरूम के अंदर की वायु गुणवत्ता (AQI) भी बाहर की तुलना में लगभग आधी पाई गई है. यह क्लास बच्चों के लिए न सिर्फ आरामदायक बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुरक्षित है. फिलहाल इस स्ट्रक्चर का ट्रायल फेज चल रहा है. एक्सपर्ट का दावा है कि SUGARCRETE से बने स्ट्रक्चर 100 साल या उससे ज्यादा टिकाऊ रह सकते हैं. अगर यह ट्रायल सफल होता है तो आने वाले समय में एनसीआर में कंक्रीट की जगह SUGARCRETE से बने स्कूल, ऑफिस और मकान देखे जा सकते हैं.

बना सकते हैं कितने फ्लोर

कविता सक्सेना ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन और इंडिया मैन्युफैक्चर कैमिकल सिस्टम टेक्नोलॉजी ने हाइड करके रखी है. हम इसमें कई बार कई तरह के छोटे छोटे आयोजन करते आ रहे हैं. ये इसी साल बीते मार्च में बनकर तैयार हुआ है. कई ट्रायल फेस कंप्लीट हुए हैं और अभी कई बाकी हैं. सभी ट्रायल कंप्लीट होने के बाद ऐसे और क्लासरूम को बनाने का विचार है, ताकि विषम परिस्थितियों में इनका उपयोग किया जा सके. दो से तीन फ्लोर इस गन्ने के कचरे वाली ईंट से आराम से बन सकते हैं.Location :Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradeshhomeuttar-pradeshअब भूकंप से बचाएगा गन्ना, नोएडा वालों ने निकाला तोड़, ये ईंटें आग से भी सेफ

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