Uttar Pradesh

डीप फ्राइंग से स्वास्थ्य जोखिम | डीप फ्राइंग के लिए सबसे अच्छा तेल कौन सा है |

आज के बदलते खानपान और लाइफस्टाइल में डीप फ्राई खाना आम हो गया है. समोसा, कचौड़ी, पूड़ी, पकौड़े और फ्रेंच फ्राइज जैसी चीजें स्वाद में भले ही लाजवाब लगती हों, लेकिन गलत तेल और गलत तरीके से तलना दिल और पाचन तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. विशेषज्ञों की मानें तो डीप फ्राई पूरी तरह छोड़ देना ही बेहतर है, लेकिन अगर इसे खाना ही है, तो सही तेल और सही नियमों का पालन बेहद जरूरी है.

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पल्लव प्रजापति ने बताया कि आज हम अपनी देसी प्रकृति और पारंपरिक खानपान से दूर होते जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि आयुर्वेद में किसी भी चीज की अति को बेकार बताया गया है. चाहे अमृत ही क्यों न हो, अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक है. डीप फ्राई चीजें आयुर्वेद के अनुसार वर्जित मानी गई हैं, क्योंकि अत्यधिक तेल में तला हुआ भोजन शरीर में वसा बढ़ाता है, कोलेस्ट्रॉल को असंतुलित करता है और हृदय रोगों का खतरा पैदा करता है. खासकर बार-बार गर्म किए गए तेल का उपयोग तो और भी अधिक हानिकारक है.

डीप फ्राइंग के लिए सही तेल का चुनाव करना बहुत जरूरी है. विशेषज्ञों के मुताबिक डीप फ्राइंग के लिए ऐसे तेल का चयन करना चाहिए, जिसका स्मोक पॉइंट अधिक हो और जो ऑक्सीडेशन में जल्दी खराब न हो. बेहतर विकल्पों में मूंगफली का तेल शामिल है क्योंकि यह तलने के लिए एक स्थिर विकल्प माना जाता है. इसके अलावा राइस ब्रान ऑयल भी अच्छा है क्योंकि इसमें पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. सरसों के तेल को भी सीमित मात्रा में और सही तापमान पर इस्तेमाल करना फायदेमंद रहता है. इन तेलों का उपयोग करने से तलने के दौरान हानिकारक तत्व कम बनते हैं, हालांकि रिफाइंड तेलों का बार-बार उपयोग करने से हमेशा बचना चाहिए.

डीप फ्राइंग के जरूरी नियम और सावधानियां बहुत जरूरी है. सबसे पहले तो इनके अत्यधिक सेवन से बचें और कोशिश करें कि हफ्ते या 15 दिन में केवल एक बार ही ऐसी चीजें लें. तेल का दोबारा इस्तेमाल बिल्कुल न करें क्योंकि बार-बार गर्म किया गया तेल ट्रांस फैट और टॉक्सिन पैदा करता है. तलते समय सही तापमान का ध्यान रखें क्योंकि बहुत ज्यादा गर्म तेल भोजन को बाहर से जला देता है और अंदर से कच्चा छोड़ सकता है. कड़ाही में हमेशा ताजा और जरूरत भर ही तेल लें ताकि उसे दोबारा गर्म करने की नौबत न आए. जहां संभव हो, शैलो फ्राई या एयर फ्राई जैसे आधुनिक और सुरक्षित विकल्प अपनाना सबसे बेहतर रहता है.

आयुर्वेद संतुलन की बात करता है, अतः भोजन में संयम ही सबसे बड़ा नियम है. स्वाद जरूरी है, लेकिन स्वास्थ्य उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. इसलिए अगली बार जब डीप फ्राई खाने का मन करे, तो तेल और तरीके का चुनाव सोच-समझकर करें.

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