बहराइच: जिले में महिलाएं विभिन्न प्रोडक्ट बनाने के साथ-साथ केले के वेस्टेज तने से तरह-तरह के डेकोरेटिव और इस्तेमाल करने योग्य वस्तुएं बनाकर परचम लहरा रही हैं। इन वस्तुओं में बात करें तो डलिया, बैग, डेकोरेटिव आइटम समेत तमाम चीजें शामिल हैं, जो देखने में काफी खूबसूरत और मनमोहन लगती हैं।
इन वस्तुओं को बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए तेजवापुर ब्लॉक के ब्लॉक मिशन मैनेजर संतोष कुमार ने बताया कि केले के वेस्टेज तने से विभिन्न सामग्री को बनाने के लिए सबसे पहले केले के तने से पतले-पतले रेसे निकाले जाते हैं और फिर इन रेसों को सुखाकर गुंथकर तरह-तरह की सामग्री बना ली जाती है, जिसकी कीमत मेहनत और आकर पर निर्भर करती है।
केले से बने हुए प्रोडक्ट की खासियत की बात करें, तो ये नेचुरल होते हैं और काफी टिकाऊ होते हैं। इसके साथ यह पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचते हैं। अंत में खराब होते-होते भी ये मिट्टी में मिल जाते हैं। जबकि आजकल आने वाले प्लास्टिक के बैग वातावरण को काफी प्रदूषित भी करते हैं। इसके अलावा केले के वेस्टेज तने को फेंकने के बजाय काम में ले लेने से भी आसपास गंदगी होने से बच जाती है।
केले के तने से बनी हुई सामग्री की कीमत की बात करें, तो इसकी शुरुआती कीमत लगभग 100 रुपये से शुरू होकर हजारों रुपये तक जाती है। जिस तरह जिसमें समय लगता है, उस हिसाब से उसका मूल्य निर्धारण किया जाता है। इसको और ज्यादा मनमोहन सुंदर बनाने के लिए इसमें कुछ बनावटी फूल-मोती आदि लगाए जाते हैं। इससे यह देखने में और भी ज्यादा खूबसूरत लगता है।
इसको लेने के लिए आपको विकासखंड तेजवापुर जाना पड़ेगा, जहां पर आपको समूह की महिलाओं द्वारा बनाए जाने वाला यह खास प्रोडक्ट आसानी से मिल जाएगा। इसको लेकर आप अपने घर की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ बाजार में बैग की तरह लाने और ले जाने का काम भी कर सकते हैं।

