Uttar Pradesh

‘आंसर में बनाए रखें इंडिविजुअलिटी’, पीसीएस परीक्षा में कैसे लिखें हाई-स्कोरिंग उत्तर, असिस्टेंट कमिश्नर ने बताई ट्रिक

ग्रेटर नोएडा. प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि सही रणनीति और प्रभावी प्रस्तुतीकरण से मिलती है. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) की मुख्य परीक्षा को लेकर हाल ही में आयोजित एक मार्गदर्शन सत्र में गौतमबुद्ध नगर कि असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इंडस्ट्रीज स्वीटी उपाध्याय और मेंटर करन मेघानी ने अभ्यर्थियों को हाई-स्कोरिंग उत्तर लिखने की विस्तृत रणनीति साझा की. दोनों विशेषज्ञों ने विशेष रूप से आखिरी 30 दिनों की तैयारी, उत्तर लेखन की मौलिकता और यूपी-विशेष (UP-Specific) दृष्टिकोण पर जोर दिया.असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इंडस्ट्रीज स्वीटी उपाध्याय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुख्य परीक्षा के अंतिम एक महीने को हल्के में नहीं लेना चाहिए. इस समय नई चीजें पढ़ने के बजाय रिवीजन, टेस्ट प्रैक्टिस और उत्तरों की गुणवत्ता सुधार पर ध्यान देना चाहिए. “हर अभ्यर्थी का उत्तर लिखने का तरीका अलग होता है. इसलिए अपनी इंडिविजुअलिटी और ऑथेंटिसिटी बनाए रखें,” उन्होंने कहा. उनके अनुसार उत्तर की शुरुआत करंट अफेयर्स से की जा सकती है, फिर विषय के विश्लेषण पर जाएं और अंत में संतुलित ‘वे फॉरवर्ड’ प्रस्तुत करें.

यह भी बताया कि उत्तर में उत्तर प्रदेश से जुड़े उदाहरण शामिल करने से चयन की संभावना बढ़ जाती है. “कॉपी जांचने वाले अधिकतर प्रोफेसर या अधिकारी यूपी से जुड़े होते हैं. यदि आपके उत्तर में प्रदेश की योजनाएं, नीतियां, पर्यटन, कृषि या औद्योगिक विकास का उल्लेख होगा तो वह अधिक प्रभावी लगेगा,” उन्होंने कहा. उन्होंने अपने 2019 में मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि यूपी-विशिष्ट बिंदुओं ने उन्हें बढ़त दिलाई.दूसरी ओर, मेंटर करन मेघानी ने उत्तर लेखन को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि बचे हुए 30 दिनों में अभ्यर्थियों को प्रतिदिन कम से कम पांच उत्तर लिखने चाहिए. सप्ताह में एक फुल-लेंथ टेस्ट जरूर दें और उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है उसका विश्लेषण. उनके अनुसार, टेस्ट एनालिसिस से ही अभ्यर्थी को अपनी वास्तविक स्थिति का पता चलता है. कहां संरचना कमजोर है, कहां डेटा की कमी है और कहां समय प्रबंधन में सुधार की जरूरत है.

करन मेघानी ने उत्तर लेखन के लिए एक स्पष्ट फ्रेमवर्क भी साझा किया. उन्होंने बताया कि परिचय (इंट्रोडक्शन) में प्रश्न से संबंधित सटीक परिभाषा या संदर्भ होना चाहिए. यदि संभव हो तो किसी प्रासंगिक अधिनियम, समिति या रिपोर्ट का उल्लेख करें. मुख्य भाग (Body) में उप शीर्षक, बिंदुवार प्रस्तुति, फ्लोचार्ट या सरल आरेख का उपयोग करें. उदाहरण और डेटा जोड़ना उत्तर को मजबूत बनाता है. उत्तर को करंट अफेयर्स से जोड़ें और जहां संभव हो, यूपी का उदाहरण जरूर दें. निष्कर्ष (Conclusion) में संतुलित दृष्टिकोण और व्यावहारिक ‘वे फॉरवर्ड’ होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि संविधान के मूल्यों, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) या राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करके निष्कर्ष को प्रभावी बनाया जा सकता है.

एथिक्स पेपर को लेकर भी दोनों विशेषज्ञों ने विशेष रणनीति बताई. करन मेघानी ने कहा कि नैतिकता से जुड़े प्रमुख सिद्धांतों और विचारकों की परिभाषाएं याद रखें. केस स्टडी की नियमित प्रैक्टिस करें और उत्तर में स्पष्टता को प्राथमिकता दें. “लंबा उत्तर लिखना जरूरी नहीं, स्पष्ट और संरचित उत्तर अधिक अंक दिलाता है. अभ्यर्थी रोज की खबरों को सिलेबस से जोड़कर पढ़ें. पिछले छह महीनों का समरी का रिवीजन करें और विशेष रूप से विधेयक, अधिनियम, आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े तथा सामाजिक मुद्दों पर ध्यान दें. दोनों ने कुछ सामान्य गलतियों से बचने की भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि परीक्षा के अंतिम सप्ताह में नया विषय शुरू करना, वैकल्पिक विषय की अनदेखी करना, बिना संरचना के उत्तर लिखना और टेस्ट फीडबैक को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है.

समय प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए. अभ्यर्थियों को अभी से 7-8 मिनट में 10 अंकों का, 10-11 मिनट में 15 अंकों का और लगभग 15 मिनट में 20 अंकों का उत्तर लिखने की आदत डालनी चाहिए. इससे परीक्षा के दबाव में भी संतुलन बना रहेगा. सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, आत्मविश्लेषण और क्षेत्रीय संदर्भ की समझ आवश्यक है. असिस्टेंट कॉमिश्नर ने कहा कि सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि सही प्रस्तुतीकरण ही आपको भीड़ से अलग बनाता है.

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