गेहूं की फसल कटते ही किसान और व्यापारी उसे सुरक्षित रखने की तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन कई बार भंडारण के दौरान गेहूं में कीड़े, घुन या फफूंद लग जाती है, जिससे पूरी फसल खराब हो सकती है. खासकर गर्मी और नमी के मौसम में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में सही तरीके अपनाना बेहद जरूरी है.
गेहूं व्यापारी राम जी गुप्ता बताते हैं कि, वे वर्षों से पारंपरिक तरीकों का उपयोग कर रहे हैं. उनके अनुसार, गेहूं को स्टोर करते समय उसमें सूखे नीम के पत्ते मिला देने से कीड़े नहीं लगते, नीम की खुशबू और उसके प्राकृतिक गुण कीटों को दूर रखते हैं. इसके अलावा, थोड़ी मात्रा में साबुत नमक कपड़े में बांधकर ड्रम में रख दिया जाए तो नमी नियंत्रित रहती है. कुछ लोग माचिस की 8, 10 तीलियां भी अनाज में डालते हैं. तीलियों में मौजूद फॉस्फोरस की गंध कीटों को दूर रखने में मदद करती है.
भंडारण से पहले गेहूं को 2, 3 दिन तेज धूप में अच्छी तरह सुखाना चाहिए. अगर अनाज में थोड़ी भी नमी रह गई तो कीड़े लगने की संभावना बढ़ जाती है. सूखाने के बाद ही उसे बोरी या ड्रम में भरें, आजकल लोहे या प्लास्टिक के एयरटाइट ड्रम उपलब्ध हैं. इनमें गेहूं भरकर ढक्कन अच्छी तरह बंद कर दें, हवा का प्रवेश कम होगा तो कीड़े पनप नहीं पाएंगे. समय-समय पर डिब्बों की जांच भी करते रहें.
अपने गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए यह भी कुछ खास उपाय हैं. अगर आप इनका इस्तेमाल करते हैं तो, गेहूं को जहां पर आप स्टोर करके रखेंगे वहां पर वह सुरक्षित रहेगा और बस कुछ खास ध्यान देने होंगे जो बेहद जरूरी है. सूखी लाल मिर्च या तेजपत्ता भी अनाज में रखने से कीड़े दूर रहते हैं. भंडारण स्थल साफ और सूखा होना चाहिए. जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर बोरी रखें ताकि नमी न लगे. हर 30, 40 दिन में गेहूं को पलटते रहें.
विशेषज्ञों का मानना है कि, थोड़ी सी लापरवाही पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर सकती है. इसलिए कटाई के बाद सही तरीके से सुखाना, साफ-सफाई रखना और पारंपरिक उपाय अपनाना बेहद जरूरी है. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो गेहूं सालभर सुरक्षित रहेगा और नुकसान से बचाव होगा.

