Uttar Pradesh

उड़द दाल की खेती | कृषि समाचार |

कृषि समाचार: गेहूं कटाई के बाद खाली खेत में उड़द की बुवाई करें और मुनाफा कमाएं

क्या आप गेहूं की कटाई के बाद अपने खेत को खाली छोड़ देते हैं? अगर हां, तो आप अपनी कमाई का एक बड़ा मौका गंवा रहे हैं. बाराबंकी के जिला कृषि अधिकारी विजय कुमार ने उड़द की उन खास किस्मों के बारे में बताया है जो मात्र 75 दिनों में आपके खाली पड़े खेत को मुनाफे की मशीन बना सकती हैं. मानसून से पहले ही कटकर तैयार होने वाली ये किस्में न केवल आपकी जेब भरेंगी, बल्कि आपके खेत की मिट्टी को भी पहले से ज्यादा ताकतवर बना देंगी.

उत्तर प्रदेश में सीजन के हिसाब से मोटे अनाजों के साथ दलहनी फसलें बड़े स्तर पर उगाई जाती हैं. इन्हीं में उड़द की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है. बाजार में उड़द की मांग सालभर रहती है, इसलिए इसके दाम हमेशा अच्छे मिलते हैं. रबी की फसल जैसे गेहूं, सरसों और मसूर की कटाई के बाद किसान अक्सर अपने खेत खाली छोड़ देते हैं. अगर उन खाली खेतों में उड़द की बुवाई की जाए, तो बहुत कम समय में एक एक्स्ट्रा फसल लेकर अच्छी कमाई की जा सकती है.

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि उड़द की खेती साल में दो बार की जा सकती है. यह एक ऐसी दलहनी फसल है जिसकी डिमांड कभी कम नहीं होती. अगर किसान भाई मार्च के महीने में इसकी खेती करना चाहते हैं, तो वे कुछ उन्नत किस्मों को चुन सकते हैं. ये किस्में बहुत जल्दी तैयार हो जाती हैं और कम लागत में भी बढ़िया मुनाफा दे जाती हैं.

टी 9- उड़द की इस किस्म के दाने मीडियम साइज के, काले और चमकदार होते हैं. किसान इस किस्म को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं और इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. यह फसल बुवाई के महज 75 से 80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. गर्मियों में इसे बोने का फायदा यह है कि यह मानसून आने से पहले ही घर आ जाती है. इससे प्रति हेक्टेयर 9 से 10 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है.

आजाद 2- इस किस्म की खेती उत्तर प्रदेश में बहुत ज्यादा होती है. यह भी 75 से 80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसके दाने बड़े और मध्यम काले रंग के होते हैं. अगर सही तरीके से खेती की जाए, तो किसान भाई एक हेक्टेयर में 10 से 11 क्विंटल तक का उत्पादन ले सकते हैं.

पीयू-31- इस किस्म के दाने मध्यम आकार के होते हैं. यह फसल मात्र 70 से 80 दिनों में पक जाती है. यह किस्म विशेष रूप से राजस्थान की जलवायु के लिए बहुत अच्छी मानी गई है. इससे प्रति हेक्टेयर 10 से 12 क्विंटल तक पैदावार मिलने की उम्मीद रहती है.

ईपीयू 94-1- ये किस्म मैदानी इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए यह किस्म बहुत फायदेमंद है. इसे पकने में लगभग 85 दिन का समय लगता है. समय थोड़ा ज्यादा जरूर है, लेकिन इससे मिलने वाला उत्पादन भी काफी अच्छा है. एक हेक्टेयर खेत में इससे 11 से 12 क्विंटल तक की फसल प्राप्त की जा सकती है.

पीडीयू 1- इस किस्म को भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. यह अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों में से एक है. पीडीयू 1 की खेती करके किसान भाई प्रति हेक्टेयर 10 से 11 क्विंटल तक की उपज हासिल कर सकते हैं.

उड़द की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम पानी और कम देखरेख में तैयार हो जाती है. यह मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार भी अच्छी होती है. अगर आप गेहूं की कटाई के बाद खेत को खाली नहीं छोड़ते, तो उड़द आपकी आमदनी बढ़ाने का सबसे सरल जरिया है.

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