कौशाम्बीः जिले से बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया है. जहाँ सरकार की हर घर नल से जल योजना लोगों को शुद्ध पेयजल देने का दावा करती है, वहीं उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में यही नल अब लोगों के लिए जहर उगल रहा हैं. सिराथू तहसील के शहजादपुर गांव में बीते चार दिनों से घरों में लगे नलों से साफ पानी नहीं, बल्कि नाले जैसा काला और बदबूदार पानी निकल रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही नल खोला जाता है, तो पानी के साथ तेज दुर्गंध फैल जाती है. यह पानी इतना अधिक दूषित है कि हाथ लगाना भी मुश्किल हो गया है, पीने की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती. इस भयावह स्थिति ने पूरे गांव में दहशत का माहौल बना दिया है.
15 हजार की आबादी का है गांव
शहजादपुर लगभग 15 हजार की आबादी वाले गांव है. जहाँ पर जल निगम की सप्लाई ही पेयजल का एकमात्र साधन है. उससे भी लोगों के घरों मे काला पानी पहुंच रहा है. नलो मे काला पानी देख ग्रामीण हैरान हो गए. दूषित पानी की आपूर्ति ने ग्रामीणों को गंभीर संकट में डाल दिया है. मजबूरी में ग्रामीणों को अब दूर-दराज के हैंडपंपों, निजी बोरिंग, व RO का पानी खरीदकर या अन्य असुरक्षित स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है.
घर पहुंच रहा गंदा पानी
ग्रामीण मोहम्मद इकराम का आरोप है कि यह पूरी स्थिति जल निगम की घोर लापरवाही का नतीजा है. आशंका जताई जा रही है कि कहीं पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होकर नाले से जुड़ गई है, जिसके कारण गंदा और जहरीला पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है. इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा नहीं लिया है.
अंकित कुमार ने बताया कि गांव में चार दिनों से सभी घरों में लगे नल में काला पानी निकल रहा है. यह चिंता केवल आज की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आने वाले खतरे का भी डर सता रहा है. गांव वालों का कहना है कि यदि समय रहते इस दूषित पानी की सप्लाई नहीं रोकी गई, तो यहां हैजा, टाइफाइड, पीलिया जैसी जानलेवा बीमारियां फैल सकती हैं, जिससे बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है.
इंदौर की घटना से डरे हैं लोग
ग्रामीण विश्वामित्र केसरवानी ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 10 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग बीमार पड़े हैं. शहजादपुर के लोगों को डर है कि कहीं ऐसी ही कोई भयावह घटना कौशाम्बी के इस गांव में न दोहराई जाए, क्योंकि फिलहाल प्रशासन और जल निगम की ओर से कोई ठोस कदम उठता नजर नहीं आ रहा है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे किसी सुविधा की नहीं, बल्कि अपने जीवन के अधिकार शुद्ध पेयजल की मांग कर रहे हैं. यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे.

