Uttar Pradesh

बरसात में इस आसान काम से बढ़ाएं वर्मी कंपोस्ट उत्पादन और मोटी कमाई, जानिए तरीका

बारिश के बचे दिनों में करें ये खास काम, वर्मी कंपोस्ट से कमाएं लाखों

बारिश का मौसम कुछ दिन के लिए थमा है, लेकिन इस बचे हुए समय का सही उपयोग करना बेहद जरूरी है. इस दौरान आप वर्मी कंपोस्ट को इस तरह तैयार करें कि इसका उत्पादन अधिक हो और आप लाखों रुपए की कमाई कर सकें. आइए जानते हैं एक आसान और प्रभावी विधि, जिससे वर्मी कंपोस्ट बनाकर आप अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।

बारिश के मौसम में केवल इंसान ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी और अन्य जीव भी प्रभावित होते हैं. ऐसे समय में किसानों का मित्र कहे जाने वाले केंचुए पर भी असर पड़ता है. केंचुए का महत्व इस बात से पता चलता है कि वर्मी कंपोस्ट बनाने में इसका अहम योगदान होता है. प्रोफेसर सुशील श्रीवास्तव के अनुसार, वर्मी कंपोस्ट दो अलग-अलग प्रकार के केंचुओं से तैयार किया जा सकता है. इसके लिए वे आइसिनिया फेटिडा प्रजाति के ‘एपिजाइक’ वैरायटी के केंचुओं का उपयोग करते हैं, जिनका जीवन चक्र लगभग 85–90 दिन का होता है. ये केंचुए गोबर और फसल अवशेष जैसे जैविक कचरे को तेजी से विघटित करके उच्च गुणवत्ता वाला कम्पोस्ट तैयार कर देते हैं।

किसान अनिल कुमार के अनुसार, बारिश के मौसम में वर्मी कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले गाय या भैंस के गोबर और फसल अवशेष को कुछ दिनों तक खुले में रखा जाता है ताकि यह ठंडा हो जाए. इसके बाद इसमें केंचुए छोड़ दिए जाते हैं, जो धीरे-धीरे गोबर और जैविक अवशेष को वर्मी कम्पोस्ट में बदल देते हैं. इस दौरान केंचुए तेजी से प्रजनन भी करते हैं, जिससे कम्पोस्ट की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बढ़ जाती है।

के.एन.आई.पी.एस.एस. सुल्तानपुर में एग्रोनॉमी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की दो प्रमुख विधियां हैं: पहली पिट विधि और दूसरी हिप विधि. भारत में हिप विधि को वर्मी कंपोस्ट उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस विधि में खेत की लंबाई चौड़ाई की तुलना में अधिक रखी जाती है. खास बात यह है कि पिट और हिप दोनों विधियों का उपयोग गर्मी, सर्दी और बरसात—तीनों मौसम में किया जा सकता है।

डॉ. सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि केंचुए सीधे सूरज की रोशनी को पसंद नहीं करते. डायरेक्ट सनलाइट से केंचुआ की स्किन में रोग उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे वे मर सकते हैं. इसलिए वर्मी कंपोस्ट बनाते समय यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि इसके ऊपर सीधी धूप न पड़े.

वर्मी कंपोस्ट तैयार होने के बाद इसे छोटे पैकेट में पैक करके बाजार में बेचा जा सकता है. इससे न सिर्फ अच्छी आय होती है, बल्कि जैविक खेती में इसकी उपयोगिता भी बढ़ जाती है. अगर आपको वर्मी कंपोस्ट तैयार होने के बाद इसे बाजार तक ले जाने में कठिनाई होती है या संसाधनों की कमी है, तो आप इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेच सकते हैं. फ्लिपकार्ट, अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर वर्मी कंपोस्ट को आसानी से लिस्ट करके बिक्री की जा सकती है.

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