Uttar Pradesh

गेहूं-धान नहीं… इस विदेशी फल की बागवानी ने बदल दी किसान की किस्मत, बन गया लखपती!

Last Updated:June 09, 2025, 14:40 ISTसोनभद्र के बाबूलाल मौर्य ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से कृषि में नई सफलता हासिल की है. तकनीक और विशेषज्ञ सलाह से उन्होंने कम लागत में अधिक लाभ कमाया, जिससे अब अन्य किसान भी इस खेती में रुचि लेने लगे हैं.X

ड्रैगन फ्रूट ने इस किसान की बदली किस्मत, आज होती है मोटी कमाईहाइलाइट्सबाबूलाल मौर्य ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से सफलता पाई.ड्रैगन फ्रूट की मांग वाराणसी, मुंबई तक पहुंची.ड्रैगन फ्रूट स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है.सोनभद्र- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के निवासी बाबूलाल मौर्य आज किसानी और आधुनिक कृषि में एक चर्चित नाम बन चुके हैं. उनकी सफलता की कहानी सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब प्रदेश और देशभर के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और कुछ ही वर्षों में इसे लाभ का सौदा बना लिया.

एक नया प्रयोग बना जीवन की दिशा
बाबूलाल मौर्य बताते हैं कि उन्होंने महज तीन साल पहले ड्रैगन फ्रूट का नाम सुना था. लेकिन 2023 में जब उन्होंने इसकी खेती की शुरुआत की, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि यह उनकी किस्मत बदलने वाला फैसला साबित होगा. उन्होंने उद्यान विभाग से तकनीकी सलाह और पौधे मंगवाकर खेती की शुरुआत की, जिसमें थाइलैंड, चीन और मलेशिया जैसी जगहों के अनुभव का लाभ लिया गया.

तकनीकी खेती से बढ़ी आय ड्रैगन फ्रूट के पौधे मात्र 18 महीने में फल देने लगे. प्रारंभ में जहां फल केवल टेस्टिंग में उपयोग हुए, वहीं अब इन फलों की मांग वाराणसी, मुंबई जैसे शहरों तक पहुंच गई है. बाबूलाल बताते हैं कि अब व्यापारी उनके फार्म पर सीधे आते हैं और यही से माल ले जाते हैं, जिससे मंडी जाने की झंझट खत्म हो गई है और आय में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है.

सेहत के लिए वरदान
ड्रैगन फ्रूट सिर्फ आमदनी का जरिया नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद लाभकारी है. कई गंभीर बीमारियों में यह फल रामबाण माना जा रहा है. यही वजह है कि बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. बाबूलाल मौर्य का मानना है कि यह खेती कम खर्च में कई वर्षों तक लगातार मुनाफा दे सकती है.

दूसरे किसान भी ले रहे प्रेरणाबाबूलाल की इस सफलता को देख अब सोनांचल के अन्य किसान भी ड्रैगन फ्रूट की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. उन्होंने अपील की है कि अन्य किसान भी इस लाभकारी खेती को अपनाएं, क्योंकि यह भविष्य की जरूरत और बाजार की मांग दोनों को पूरा करती है.
Location :Sonbhadra,Uttar Pradeshhomeagricultureगेहूं-धान नहीं… इस विदेशी फल की बागवानी ने बदल दी किसान की किस्मत, बन गया लखपत

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