Uttar Pradesh

Fake University, University News, UP News: हो जाएं सावधान! इस यूनिवर्सिटी ने बना दीं एक लाख फर्जी डिग्रियां

Fake University, University News, UP News: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित मोनाड विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह बेहद शर्मनाक है. उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF)ने इस विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री और मार्कशीट के विशाल रैकेट का पर्दाफाश किया है. जांच में सामने आया है कि पिछले चार वर्षों में इस विश्वविद्यालय ने एक लाख से अधिक फर्जी डिग्रियां बांटी हैं. य‍ह न केवल शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा धब्बा है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है. इस घोटाले ने नौकरीपेशा लोगों और छात्रों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि ऐसी डिग्रियों के आधार पर कई लोग सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरियां कर रहे हैं.

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?

2024 में मेरठ पुलिस ने तीन लोगों के बैग से 140 फर्जी दस्तावेज बरामद किए,जिनमें मोनाड विश्वविद्यालय की आठ मार्कशीट शामिल थीं. इसके बाद से ही STF की जांच शुरू हुई,जिसने इस घोटाले की परतें उधेड़ दीं. STF की छापेमारी में 1,372 फर्जी मार्कशीट,डिग्रियां और 262 फर्जी प्रोविजनल व माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए. ये डिग्रियां बीए,बीएड,बीफार्मा,बीसीए,बीटेक और एलएलबी जैसे कोर्स की थीं,जिन्हें 50,000 से लेकर 4 लाख रुपये तक में बेचा जा रहा था.

कौन कौन हुआ अरेस्‍ट?

STF ने विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन विजेंद्र सिंह हुड्डा,प्रोचांसलर नितिन कुमार सिंह और आठ अन्य कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है. विजेंद्र सिंह पहले से ही कुख्यात बाइक बोट घोटाले के मुख्य आरोपी हैं,जिसके लिए वह 5 लाख रुपये का इनामी रह चुका है.जांच में पता चला कि विजेंद्र ने अपनी अवैध कमाई को 20 से अधिक कंपनियों में निवेश किया था और अब STF इन सभी खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया में है.STF ने यह भी खुलासा किया कि फर्जी डिग्रियों के आधार पर 228 लोग सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं.अब इनकी नौकरियां खतरे में हैं. साथ ही मेरठ के एक अन्य निजी कॉलेज,SVS कॉलेज के सर्वर की भी जांच की जा रही है जो इस रैकेट से जुड़ा हो सकता है.

कहां है मोनाड विश्वविद्यालय?

मोनाड विश्वविद्यालय उत्‍तर प्रदेश के हापुड़ में है. इसकी स्‍थापना 2010 में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिनियम 23 के तहत हुई थी और यह यूजीसी से मान्यता प्राप्त है. यह विश्वविद्यालय फार्मेसी, इंजीनियरिंग,कानून,प्रबंधन और अन्य यूजी-पीजी कोर्सेज कराने का दावा करता है. 58 एकड़ में फैले इस परिसर में करीब 6,000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन STF की जांच ने इसकी छवि को धूमिल कर दिया है. विश्वविद्यालय का प्रबंधन ढाई साल पहले विजेंद्र सिंह ने खरीदा था,जिसके बाद से यह फर्जी डिग्रियों का अड्डा बन गया.पुलिस के अनुसार यह फर्जीवाड़ा केवल हापुड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल उत्तर प्रदेश की चार अन्य यूनिवर्सिटियों और अन्य राज्यों तक फैला हुआ है. हापुड़ के डीएम अभिषेक पांडे ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की है और जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने की उम्मीद है.

STF ने क्‍या-क्‍या कार्रवाई?

STF ने विश्वविद्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज,कंप्यूटर और अन्य सामग्री जब्त की है. विजेंद्र सिंह के बैंक खातों की जांच चल रही है और उनके साथ-साथ विश्वविद्यालय और SVS कॉलेज के खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. एक अन्य मामले में बिजनौर के देहरादून रोड पर एक कॉलेज में अवैध तरीके से परीक्षा कराने के आरोप में STF ने परीक्षा कॉपियां जब्त की थीं,लेकिन पूछताछ के बाद विश्वविद्यालय के परीक्षा प्रभारी को छोड़ दिया गया

सावधान रहें छात्र

इस घोटाले ने उन हजारों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है, जिन्होंने अपनी मेहनत और पैसे खर्च कर मोनाड विश्वविद्यालय से डिग्रियां हासिल की थीं. X पर कई यूजर्स ने इस मामले पर गुस्सा जाहिर किया है.एक यूजर ने लिखा-हापुड़ में इस विश्वविद्यालय ने हजारों नौजवानों के साथ धोखा किया है. लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उनकी डिग्रियां अब बेकार हैं.मोनाड विश्वविद्यालय का यह घोटाला शिक्षा व्यवस्था में गहरे भ्रष्टाचार को उजागर करता है. यह उन छात्रों और अभिभावकों के लिए एक चेतावनी है जो बिना जांच-पड़ताल के किसी विश्वविद्यालय में दाखिला लेते हैं. शिक्षा के इस पवित्र क्षेत्र को कुछ लोग मुनाफे का धंधा बना रहे हैं, जिसका खामियाजा मासूम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. STF की कार्रवाई और सरकार की सख्ती से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़ों पर रोक लगेगी.

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