Uttar Pradesh

अनोखा जुगाड़! यूपी में गंगा की रेती पर सब्जियों की अनोखे तरीके से खेती, बिना मोटर-पंप के होती है सिंचाई, देखकर वैज्ञानिक भी हैरान

Last Updated:April 21, 2025, 06:52 ISTAgricultural News: गाजीपुर के किसानों ने गंगा नदी के रिसाव से रेत पर खेती कर कमाल कर दिया है. बिना कुआं या पंप के, देसी जुगाड़ से सिंचाई कर तगड़ी कमाई कर रहे हैं. वैज्ञानिक भी इस तकनीक से हैरान हैं.X

गाजीपुर के रेत में खेती: जहां गंगाजल खुद रिसता है, वहीं से चलता है खेत भी और घरहाइलाइट्सगाजीपुर के किसानों ने रेत में 100 बीघा में खेती की.बिना मोटर-पंप, गंगा का पानी खुद भरता है.देसी जुगाड़ से वैज्ञानिक भी हैरान.गाजीपुर: यूपी में गाजीपुर के किसानों ने रेत पर खेती कर कमाल कर दिया है. यह पूरी खेती किसानों ने पूरी तरह से देसी जुगाड़ से किया है. किसानों ने गंगा नदी की धाराओं के बीच तालाब और कुएं जैसा अनोखा सिस्टम बनाया है. जहां गंगा नदी के रिसाव से फसलें तैयार होती रहती हैं. किसानों ने बताया कि इससे कोई कचरा भी नहीं होता है. यहां खेती से किसान तगड़ी कमाई करते हैं.

मुश्किल जगहों पर किसानों ने लाई हरियाली

वहीं, गाजीपुर के सरैया गांव के किसानों ने रेत पर लगभग 100 बीघा में खेती कर रहे हैं. यहां न कोई कुआं, न पंप और न ही किसी बाहरी यंत्र से सिंचाई संभव है. इसके बाद भी यहां किसान गंगा नदी से सिंचाई कर तगड़ी कमाई कर रहे हैं. यहां गंगा नदी का जल धीरे-धीरे रिस-रिसकर अपने आप खेतों की सिंचाई होती रहती है. ऐसे में जहां सिंचाई भी मुश्किल थी. उस जगह को किसानों ने हरियाली ला दिया है.

वहीं, सरैया गांव के किसान त्रिभुवन ने बताया कि वह यहां पर बड़े पैमाने पर हरी सब्जियों की खेती करते हैं. यहां सिंचाई के लिए किसी कुआं या पंप की जरूरत नहीं पड़ती है. यहां गंगा किनारे किसान इतनी गहराई तक रेतीली जमनी खोद देते हैं कि उसमें धीरे-धीरे गंगाजल का रिसाव शुरू हो जाता है. देखते ही देखते यहां तैयार फसलों में पानी भर जाता है.

सिंचाई और पीने दोनों के काम आता है गंगाजल

रेत के बीच खुदे इन देसी कुओं से किसान सब्जियों की सिंचाई करते हैं. जहां 10-10 लीटर वाले 200 डब्बा पानी हर बीघे में डाला जाता है. यहां पानी भरने के लिए 10-10 लीटर वाले डब्बे उठाकर महिलाएं भी जुटी रहती हैं. किसान बताते हैं कि यह पानी वह सिंचाई के साथ-साथ पीने के भी काम में लाते हैं. यह पानी बिल्कुल मीठा होता है.

देसी जुगाड़ देख वैज्ञानिक भी हैरान

यह तकनीक ‘एक्विफर रिचार्ज’ जैसी प्रक्रिया से मेल खाती है. जहां जमीन के भीतर रिसने वाला पानी छोटे जलस्रोतों को भरता है. यहां बिना मोटर, बिना बिजली के गंगा का जलस्तर किसानों की मेहनत में तब्दील होता है. इस पानी को किसान सिंचाई और अपने पीने के काम में लाते हैं.
Location :Ghazipur,Uttar PradeshFirst Published :April 21, 2025, 06:52 ISThomeagricultureगंगा की रेती पर सब्जियों की अनोखी खेती, बिना मोटर-पंप के होती है सिंचाई

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