Uttar Pradesh

चुनाव नया, फॉर्मूला वही… पहले दलित और अब निषाद, अखिलेश यादव की जाति पॉलिटिक्स, क्या है फूलन देवी से कनेक्शन?

Last Updated:April 20, 2025, 15:27 ISTAgra News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कल आगरा में फूलन देवी का जिक्र करके एक बार फिर से दशकों पुरानी राजनीतिक कहानी को ताजा कर दिया है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अखिलेश यादव के इस बयान…और पढ़ेंअखिलेश यादव.हाइलाइट्सअखिलेश यादव को मिली जान से मारने की धमकी.फूलन देवी का जिक्र कर दलित और निषाद वोट बैंक साधने की कोशिश.आगरा: फूलन देवी की तरह मुझे भी मार देने की आ रही धमकी… अखिलेश यादव के इस बयान से आखिर वह क्या पाना चाहते हैं? रामजीलाल सुमन के बहाने समाजवादी पार्टी एक तरफ जहां दलित वोट बैंक को साधना चाहती है , वही फूलन देवी का नाम लेकर क्या अखिलेश यादव ने निषाद बिरादरी के वोट बैंक को भी एक बार फिर से अपनी तरफ करने की कोशिश कर रहे हैं.

आगरा में फूलन देवी का जिक्रसमाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कल आगरा में फूलन देवी का जिक्र करके एक बार फिर से दशकों पुरानी राजनीतिक कहानी को ताजा कर दिया है. फूलन देवी को इस देश में कौन नहीं जानता है. समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी को न सिर्फ राजनीति में प्रवेश दिलाया बल्कि उन्होंने संसद तक बनवाने का काम किया. फूलन देवी को लेकर समाजवादी पार्टी हमेशा सकारात्मक रवैया अपनाती रही है. साथ ही निषाद समाज के वोट बैंक पर भी इसलिए अपना दावा ठोकती रही है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फूलन देवी का नाम लेकर कहा कि जिस तरह से उनकी हत्या की गई थी उसी तरह से मुझे भी धमकियां आ रही हैं. ऐसे में सवाल उठता है क्या समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फूलन देवी का नाम जानबूझ कर लिया.

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जाति आंकड़ों के हिसाब से ही राजनीतिवरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल ने कहा कि अखिलेश यादव इस बात को बखूबी जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में जाति आंकड़ों के हिसाब से ही राजनीति हो सकती है. अगर जातियों में सामाजिक समीकरण को बांटा जाएगा तभी समाजवादी पार्टी को उसका सियासी फायदा होगा और शायद यही वजह है कि समाजवादी पार्टी लगातार उनकी सुरक्षा की मांग कर रही है.

क्या बोले सपा प्रवक्ता?वहीं, सपा प्रवक्ता डॉ. अनुराग भदौरिया कि हम अखिलेश यादव की सुरक्षा के लिए केंद्र से गुहार लगा रहे हैं. जिस तरह उन्हें धमकियां मिल रही हैं उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए.

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बयान का नफा नुकसान कितनाहालांकि, अगर नजर डाले तों मौजूदा समय में किसी भी राजनेता की तरफ से दिया गया बयान बहुत सोची समझी रणनीति के तहत होता है क्योंकि नेता इस बात को जानता है कि आखिर उसकी तरफ से दिया गगए बयान का नफा नुकसान कितना होगा. अखिलेश यादव ने जिस तरह से फूलन देवी की एपिसोड का एक बार फिर से जिक्र किया है. इससे साफ होता है कि समाजवादी पार्टी 2027 की चुनाव में इसका सियासी लाभ लेना चाहती है.
Location :Agra,Uttar PradeshFirst Published :April 20, 2025, 15:27 ISThomeuttar-pradeshपहले दलित और अब निषाद, अखिलेश की जाति पॉलिटिक्स, क्या है फूलन देवी से कनेक्शन?

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