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‘या कृष्ण जी के दो मा-बाप थे या मेरे.. ‘ रिंकू सिंह से भी दर्दनाक इस क्रिकेटर की कहानी, बिन फैमिली घर-घर काटे चक्कर



Himanshu Sangwan: विराट कोहली, वो नाम जो हाल के दिनों में दिल्ली के हर कोने में गूंजता नजर आया. सभी की नजरें विराट पर थीं और उन्हें रणजी में खेलते देखने के लिए फैंस की होड़ लग गई. लेकिन कोहली-कोहली के नारों के बीच कोई विराट बना तो वो हैं हिमांशु सांगवान. रेलवे के गेंदबाज ने विराट को चारो खाने चित कर सुर्खियां बटोर ली. लेकिन एक समय था जब उनपर दुखों का पहाड़ टूट गया था. यूं तो टीम इंडिया में ऐसे कई उदाहरण हैं जिन्हें ऊंचाईयों तक पहुंचने के लिए काफी कुछ त्यागना पड़ा. लेकिन कहीं न कहीं सपोर्ट के लिए फैमिली थी. लेकिन यश सांगवान ने बिन फैमिली ही घर-घर के चक्कर काटे हैं. 
विराट-विराट सुनते रहे सांगवान
यश सांगवान ने शानदार अंदाज में विराट कोहली का विकेट झटका था. स्टंप काफी दूर जा गिरा. इसे लेकर सांगवान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मैंने रणजी ट्रॉफी मैच में इतनी भीड़ कभी नहीं देखी और यह सब विराट कोहली की वजह से था. लोग बड़ी संख्या में आए, यह किसी इंटरनेशनल मैच से कम नहीं लगा. उत्साह अविश्वसनीय था, आमतौर पर, प्रशंसक जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने आते हैं. लेकिन यह मैच सिर्फ विराट के बारे में था. मैं तीन दिनों तक सिर्फ़ यही सुनता रहा ‘विराट! विराट! कोहली! कोहली!.
विराट को चारो खाने किया था चित
उन्होंने आगे कहा, ‘विराट कोहली का विकेट लेना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी. मैं इसके बारे में बात कर सकता हूं, लेकिन यह भावना शब्दों से परे है – मैं इसे व्यक्त नहीं कर सकता. मेरी आक्रामकता स्वाभाविक थी, एक गेंदबाज़, ख़ासकर एक तेज गेंदबाज को यह कभी पसंद नहीं आता कि कोई बल्लेबाज़ उसे चौका या छक्का लगाए. उसने शानदार स्ट्रेट ड्राइव खेला. एक गेंदबाज के तौर पर मैं निराश था. अगली गेंद पर मैंने ज्यादा मेहनत की और इसका फायदा मुझे मिला.’
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संघर्ष भरी है सांगवान की कहानी
हिमांशु सांगवान की कहानी बेहद संघर्ष भरी है. उन्होंने 16 साल पहले जयपुर में अपने परिवार को छोड़ दिया था. महज 17 साल की उम्र में वह बिन फैमिली दिल्ली आए. यहां नजफगढ़ इलाके में किराए के मकान की तलाश में उन्होंने कई दरवाजे खटखटाए और घर-घर घूमे. उन्हें एक मिला, अब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक वरिष्ठ टिकट कलेक्टर (टीटीई) के रूप में, सांगवान उसी परिवार के साथ रह रहे हैं जिसने उन्हें 16 साल पहले अपने साथ रखा था.
फैमिली को लेकर सांगवान ने कहा, ‘ या तो कृष्ण जी के दो माता-पिता थे या मेरे हैं. मेरा परिवार जयपुर में रहता है लेकिन पिछले 15 साल से मैं नजफगढ़ में हूं. मैं शुरू में यहां किराए के मकान की तलाश में आया था, लेकिन जिस परिवार के साथ मैं रहा, वह मकान मालिक से बढ़कर बन गया. वे मेरे अपने हो गए, उनके दो बच्चे हैं. लेकिन वे मुझे अपने सबसे बड़े बेटे की तरह मानते हैं एक असली बेटे से भी बढ़कर. अगर मुझे आधी रात को खाना चाहिए होता है, तो वे सुनिश्चित करते हैं कि मुझे खाना मिले. वे मेरी मदद करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं और मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा.’
विराट से मिला ऑटोग्राफ
सांगवान ने कहा,  ‘मैच के बाद, विराट खुद हमारे ड्रेसिंग रूम में आए मुझे गले लगाया और कहा, ‘बहुत बढ़िया गेंदबाजी की. आगे बढ़ते रहो.’ हम सभी उसे वहां देखकर हैरान थे. वह मेरी गेंद पर आउट हो गया, लेकिन फिर भी उसने मुझे प्रेरित किया. मैं वह गेंद लेकर जा रहा था जिससे मैंने उसे आउट किया था मैंने उन्हें दिखाया और उस पर हस्ताक्षर करवा लिए. वह क्षण अविस्मरणीय है.’



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