हाइलाइट्सइस बार सावन में चार सोमवार पड़े हैंप्रयागराज में कई प्राचीन और पौराणिक शिवालय मौजूदप्रयागराज. श्रावण मास के दूसरे सोमवार के मौके पर संगम नगरी प्रयागराज के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. सिविल लाइन के विश्व प्रसिद्ध शिव मंदिर में स्थित एकादश रुद्र के स्वरुप में विराजमान भगवान भोले को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु गंगाजल, शहद और दूध से जलाभिषेक करने और भगवान भोले को कमल पुष्प, बेलपत्र,धतूरा और मदार अर्पित करने आ रहे हैं. श्रद्धालु भगवान भोले शंकर से पूरे देश में सुख समृद्धि की कामना भी कर रहे हैं. सावन का पूरा महीना भगवान भोले शंकर का माना जाता है, लेकिन सावन में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व है. इस बार सावन में चार सोमवार पड़े हैं. सावन के दूसरे सोमवार के साथ ही आज त्रयोदशी और प्रदोष पड़ने से इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है.
सावन के सोमवार को लेकर श्रद्धालुओं की ऐसी मान्यता और आस्था है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने और सच्चे मन से भगवान भोले की आराधना से सभी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं. सावन में सुहागिनें जहां अपने पति और बेटे की लम्बी उम्र के लिए भगवान भोले की पूजा अर्चना करती है. वहीं कुंवारी कन्याओं द्वारा भगवान भोले की आराधना किए जाने से उन्हें अच्छे वर की प्राप्ति भी होती है.संगम नगरी प्रयागराज में कई प्राचीन और पौराणिक शिवालय मौजूद हैं, जहां पर सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
प्रयागराज में मौजूद हैं कई प्राचीन मंदिरयमुना के तट पर प्राचीन और पौराणिक मनकामेश्वर मंदिर स्थित है, जहां के बारे में मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने यहां पर जलाभिषेक किया था. इसके साथ ही अरैल में सोमेश्वर महादेव का मंदिर है. यहां के बारे में मान्यता है कि यहां पर सावन के महीने में जलाभिषेक करने से क्षय रोग के कष्ट से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही गंगा के तट पर दशाश्वमेध मंदिर स्थित है, जहां के बारे में मान्यता है कि सृष्टि की रचना के बाद भगवान ब्रह्मा ने यहीं पर यज्ञ किया था, जबकि गंगा के तट पर ही प्राचीन और पौराणिक नाग वासुकी मंदिर भी स्थित है. इसके बारे में मान्यता है कि कालसर्प दोष की मुक्ति के लिए देश के कोने-कोने से यहां पर श्रद्धालु आते हैं. 2 अगस्त को पड़ने वाली नाग पंचमी के दिन यहां पर कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे. इसके साथ ही प्रयागराज में ही यमुना नदी के तट पर तक्षक तीर्थ मौजूद है. जिस तरह से प्रयागराज तीर्थों का राजा कहा जाता है. सभी तीर्थों के दर्शन के बाद प्रयागराज आए बगैर तीर्थ यात्रा पूरी नहीं होती है. उसी तरह से नाग जाति के राजा तक्षक हैं. ऐसी मान्यता है कि तीर्थराज प्रयाग आने के बाद अगर तक्षक तीर्थ के दर्शन नहीं किए तो धार्मिक यात्रा पूरी नहीं होती है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: Prayagraj News, Sawan, Shrawan maasFIRST PUBLISHED : July 25, 2022, 09:06 IST
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