Uttar Pradesh

170 रुपए की ये दवा धान की खेती के लिए है रामबाण, जड़ों से कोसों दूर रहेंगे कीट, फसल में होगी बंपर पैदावार

Last Updated:May 18, 2025, 06:35 ISTBarabanki Paddy Cultivation: धान की खेती में पानी की अधिक आवश्यकता होती है, जिससे कीटों की समस्या बढ़ती है. बाराबंकी के कृषि उपनिदेशक श्रवण कुमार ने बताया कि जैविक मृदा उपचार से फसल को कीट और रोग से बचाया जा सक…और पढ़ें बाराबंकी: धान की खेती किसानों की प्रमुख फसल मानी जाती है तो वहीं, समय के साथ खेती की परिस्थितियों में बदलाव आया है. जमीन, पानी, खाद और बीज की गुणवत्ता में परिवर्तन हुआ है. धान की फसल में पानी की अधिक आवश्यकता होती है. जहां अधिक पानी के कारण कीटों की समस्या बढ़ जाती है. वहीं, कीट और रोग लगने से फसल को नुकसान होता है. कभी-कभी तो पूरी फसल नष्ट हो जाती है. ऐसे में किसानों को आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए. इससे उत्पादन में वृद्धि होगी. साथ ही कम लागत वाले उपायों से फसल को कीट और रोग से बचाया जा सकता है. कृषि उपनिदेशक श्रवण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत से बताया कि बताया बरसात के मौसम में धान की खेती बड़े पैमाने पर किसान करते हैं. इसकी खेती से अच्छी आमदनी भी होती है. ऐसे में धान की खेती तो अच्छी होती है. पर इसकी फसल वह पौधे में कीड़े लग जाते हैं, जिससे किसानों को नुकसान भी होता है. वहीं, किसान अगर धान के पौधों में इन चीजो का उपयोग करक़े अच्छी पैदावार ले सकते हैं. धान की फसल को जड़ खाने वाले कीटों से बचाने के लिए मिट्टी का उपचार करना होगा. मिट्टी उपचार के अलावा बीज का भी उपचार करना होगा. मिट्टी उपचार के लिए अंतिम जोताई के समय 5 किलो बैसिलस बेसियाना और मेटारिज़ियम एनीसोप्लिया का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल गोबर की खाद के साथ करना होता है. हमेशा 2 साल पुरानी मिट्टी को गोबर की खाद के साथ इस्तेमाल करें. जुताई के बाद खेत समतल करें और फिर उसमें पौधे लगाकर खेती करें.  इस जैविक मृदा का इस्तेमाल से सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सस्ता है. महंगी रासायनिक दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती है. साथ ही यह मिट्टी की सेहत को भी बरकरार रखता है. रासायनिक दवाइयां मिट्टी को सख्त और बंजर बना देती हैं, लेकिन जैविक उत्पाद मिट्टी को उपजाऊ रखते हैं. इससे आपकी फसलें ज्यादा अच्छी होती हैं और पैदावार भी बढ़ती है. इसका इस्तेमाल करने से मिट्टी उपजाऊ होती है और फंगस-रोग-कीट से छुटकारा मिलता है. साथ ही फसल भी अच्छी होगी, जिसके लिए मिट्टी उपचार की यह दवा उत्तर प्रदेश के गन्ना शोध संस्थान में किसान भाइयों को दी जाती है.जिसकी कीमत 1 किलो 170 रुपये के आस पास है. homeagricultureधान के लिए बेहद घातक हैं ये रोग, सिर्फ 170 रुपए में पाएं छुटकारा

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