गोरखपुरः भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं का सपना है. हर गली, हर मैदान और हर शहर में क्रिकेट को लेकर अलग ही दीवानगी देखने को मिलती है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में मौजूद सेंट एंड्रयू क्रिकेट ग्राउंड भी ऐसे ही सपनों की पिच बन चुका है, जहां रोज़ सुबह से शाम तक युवा खिलाड़ी अपने भविष्य को आकार देने के लिए पसीना बहाते हैं.
यशस्वी और सरफराज ने इस ग्राउंड पर बहाया पसीना
इस मैदान की पहचान सिर्फ लोकल क्रिकेट तक सीमित नहीं है. कुछ साल पहले यहां ‘यशस्वी जायसवाल और सरफराज खान जैसे खिलाड़ी नियमित प्रैक्टिस करने आते थे. उनकी दमदार बैटिंग और खास स्टाइल को देखकर मैदान में मौजूद बच्चे और युवा खिलाड़ी प्रेरित हो जाते थे. आज वही मैदान, वही पिच और वही सपना, फर्क सिर्फ इतना है कि चेहरे बदल गए हैं, लेकिन जुनून वही है.
सुबह 5 बजे से शुरू होती है मेहनत
यहां प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ी ‘अमन बताते हैं कि उनका दिन क्रिकेट के नाम होता है. सुबह के सेशन के लिए 5 बजे घर से निकलते हैं, 10 बजे तक प्रैक्टिस होती है. फिर शाम को 3 से 7 बजे तक दोबारा मैदान में रहते हैं, अमन कहते हैं. वो अकेले नहीं हैं, मैदान में मौजूद ज़्यादातर खिलाड़ियों की दिनचर्या कुछ ऐसी ही है. कई खिलाड़ी तो देर रात घर लौटते हैं, लेकिन अगले दिन फिर वही जोश और जिद के साथ मैदान में उतरते हैं.
मेहनत का फल जरूर मिलता है
गोरखपुर क्रिकेट एसोसिएशन क्रिकेट ग्राउंड के ‘जॉइंट सेक्रेटरी सफीक सिद्दीकी बताते हैं कि, इस मैदान का इतिहास खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा है. “यशस्वी और सरफराज जैसे खिलाड़ी यहीं प्रैक्टिस करते थे. बच्चे उन्हें देखते थे उनसे सीखते थे, आज वही जुनून नई पीढ़ी में दिखाई देता है. उनका मानना है कि,हर खिलाड़ी टीम इंडिया नहीं खेल सकता, लेकिन आज क्रिकेट में कई लेवल और कैटेगरी हैं, जिन्हें रिप्रेजेंट करना भी बड़ी उपलब्धि है.
गोरखपुर का यह मैदान उन सपनों की गवाही देता है, जो हर दिन बल्ले की आवाज़ और गेंद की रफ्तार के साथ जिंदा रहते हैं. यहां खेलने वाले हर बच्चे की आंखों में एक ही सपना है, भारत के लिए खेलना कुछ सपने पूरे होते हैं, कुछ अधूरे रह जाते हैं, लेकिन कोशिश और मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, सेंट एंड्रयू क्रिकेट ग्राउंड आज भी भविष्य के क्रिकेटरों को जन्म दे रहा है, उम्मीद, संघर्ष और जुनून के साथ.

