Uttar Pradesh

यूपी में जब्त हुई व्हेल की 10 करोड़ की उल्टी, क्यों महंगी और रखना गैरकानूनी



हाइलाइट्सक्यों यूपी पुलिस ने इसे रखना जुर्म माना है और गिरफ्तार किया हैव्हेल की उल्टी कोई हल्की फुल्की चीज नहीं है इसे फ्लोटिंग गोल्ड भी कहते हैंदुनिया के सभी बाजारों में ये मोटी कीमत में बिकती हैउत्तर प्रदेश पुलिस स्पेशल टास्क फोर्स ने 05 सितंबर को लखनऊ में एक गैंग के चार सदस्यों को 4.12 किलो एंबरगेरिस के साथ पकड़ा. एंबरगेरिस दरअसल व्हेल की उल्टी होती है लेकिन ये बाजार में बहुत महंगी बिकती है. देशभर में इसकी गैरकानूनी तरीके से स्मगलिंग होती है. जो एंबरग्रीस यूपी पुलिस ने पकड़ी उसका दाम करीब 10 करोड़ रुपए बताया गया है.
आप हैरान हो सकते हैं कि व्हेल की उल्टी में ऐसी क्या बात है जो ये इतनी महंगी है और इसको रखना गैरकानूनी है. वैसे आपको बता दूं कि आपके रोजाना के जीवन में व्हेल की उल्टी कहीं ना कहीं शामिल भी रहती है. इसके जो उत्पाद बनते हैं, हम उनका इस्तेमाल करते हैं. वैसे सुनने में अटपटा लग सकता है कि आखिर क्यों व्हेल का उल्टी रखना अपराध है.
किस कानून के तहत रखना अपराधइसकी वजह भी हम आपको बताते हैं. दरअसल ये एंबरग्रीस भी वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत आता है. कानून कहता है कि भारत में इसे रखना और बेचना गैरकानूनी है. इसकी तस्करी तो अपराध है ही. इसका इस्तेमाल दरअसल परफ्यूम और कई तरह की चीजों में होता है. ये आमतौर पर समुद्र तट पर मिल जाती है. विदेशों में इसको बेचकर लोगों के करोड़पति बनने के बहुत किस्से हैं.

उत्तर प्रदेश में पकड़ी गई व्हेल की उल्टी अपनी ठोस रूप में इस तरह की थी. इसका वजन करीब 4.5 किलो था तो कीमत 10 करोड़ रुपए. (UPSTF Twitter handle)

आकार-प्रकार और रंगअब हम आपको बताते हैं कि कैसे ये उल्टी इतनी बेशकीमती बन गई. कैसे इसे पहचाना जाता है. ये रूपरंग और आकार-प्रकार कैसा होता है. ये देखने में गोबर जैसी काले रंग की मलनुमा होती है लेकिन धीरे धीरे पत्थर की तरह ठोस हो जाती है और आकार प्रकार में थोड़ा भारी और बड़ी होती है. इससे आने वाली सुंगध ये बताती है कि ये बहुमूल्य एंबरग्रीस है. इसे पाने का मतलब है मालामाल हो जाना. किसी खजाने से कम नहीं होता इसका मिलना.
इसीलिए व्हेल के आसपास मंडराते हैं लोगजहां जहां व्हेल मछलियां दिखती हैं, वहां कुछ ऐसे लोग भी नजर आने लगते हैं कि व्हेल मछली उल्टी करे और वो उसके ठोस रूप को हासिल करके बाजार में बेच दें. अक्सर समुद्र तट पर आने वाली व्हेल ऐसे अपशिष्ट को निकालती हैं लेकिन अक्सर वो इसे समुद्र के पानी में ज्यादा निकालती हैं, जो पानी के साथ बह जाती हैं या उसी में घुलमिल जाती हैं.

व्हेल की उल्टी धीरे धीरे पत्थर की तरह कठोर और काली पड़ जाती है. लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान इससे आनी वाली सुगंध है. अक्सर समुद्र तटों पर ये मिल जाती है.

कोंकण तटों पर भी आने लगी हैं व्हेलभारत में कोंकण तट पर भी अब पिछले कुछ समय में व्हेल मछलियों का आना शुरू हुआ है. तो वहां भी लोग उनके आसपास फटकने लगे हैं कि वो इस उल्टी को पा सकें. वो तट के किनारे या समुद्र के तट के करीबी छोर में नीचे की ओर डूबकी लगाकर व्हेल की उल्टी का ठोस रूप खोजते हैं. माना जाता है कि व्हेल की उल्टी कुछ ही समय में ठोस पत्थर का रूप ले लेती है. फिर ये जितनी पुरानी होती जाती है, उतनी ही बेशकीमती भी हो जाती है.
आखिर यह पत्थर है क्या?कई वैज्ञानिक इसे व्‍हेल की उल्‍टी बताते हैं तो कई इसे मल बताते हैं. यह व्‍हेल के शरीर के निकलने वाला अपशिष्‍ट होता है जो कि उसकी आंतों से निकलता है और वह इसे पचा नहीं पाती है. कई बार यह पदार्थ रेक्टम के ज़रिए बाहर आता है, लेकिन कभी-कभी पदार्थ बड़ा होने पर व्हेल इसे मुंह से उगल देती है. वैज्ञानिक भाषा में इसे एंबरग्रीस कहते हैं.
इस उल्टी का बड़ा बाजारस्पर्म व्‍हेल मछली, जिसकी उल्टी या अपशिष्ट बहुत कीमती होता है. इसका पूरा एक बाजार है. इंटरनेट पर भी इसकी खरीदी-बिक्री होती है. माना जा रहा है कि समय के साथ ये और महंगी होती चली जाएगी. इसीलिए इसकी हमारे देश में भी चोरी चुपके अवैध तरीके से स्मगलिंग होती है. कानून कहता है कि अगर ये आपको कहीं मिले या पता लगे तो तुरंत पुलिस को बताएं.
क्या अपनी रक्षा के लिए व्हेल इसे पैदा करती हैदरअसल एंबरग्रीस व्हेल की आंतों से निकलने वाला स्‍लेटी या काले रंग का एक ठोस, मोम जैसा ज्वलनशील पदार्थ है. यह व्हेल के शरीर के अंदर उसकी रक्षा के लिए पैदा होता, ताकि उसकी आंत को स्क्विड(एक समुद्री जीव) की तेज़ चोंच से बचाया जा सके.आम तौर पर व्हेल समुद्र तट से काफी दूर ही रहती हैं, ऐसे में उनके शरीर से निकले इस पदार्थ को समुद्र तट तक आने में कई साल लग जाते हैं. सूरज की रोशनी और नमकीन पानी के संपर्क के कारण यह अपशिष्ट चट्टान जैसी चिकनी, भूरी गांठ में बदल जाता है, जो मोम जैसा महसूस होता है.
क्यों कहते हैं एंबरग्रीस व्हेल की पेट से निकलने वाली इस एंबरग्रीस की गंध शुरुआत में तो किसी अपशिष्ट पदार्थ की ही तरह होती है, लेकिन कुछ साल बाद यह बेहद मीठी हल्‍की सुगंध देता है. इसे एंबरग्रीस  इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह बाल्टिक में समुद्र तटों पर मिलने वाले धुंधले एंबर जैसा दिखता है. यह इत्र के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है और इस वजह से काफी कीमती होता है. इसकी वजह से इत्र की सुगंध काफी समय तक बनी रहती है. इसी वजह से वैज्ञानिक एंबरग्रीस  को तैरता सोना भी कहते हैं. इसका वज़न 15 ग्राम से 50 किलो तक हो सकता है.
परफ्यूम के अलावा कहां इस्तेमाल?एंबरग्रीस ज्यादातर इत्र और दूसरे सुगंधित उत्पाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. इससे बना इत्र अब भी दुनिया के कई इलाकों में मिलता है. प्राचीन मिस्र के लोग इससे अगरबत्ती और धूप बनाया करते थे. वहीं आधुनिक मिस्र में इसका उपयोग सिगरेट को सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. प्राचीन चीनी इस पदार्थ को “ड्रैगन की थूकी हुई सुगंध” भी कहते थे.
यूरोप में ब्लैक एज (अंधकार युग) के दौरान लोगों का मानना ​​था कि एंबरग्रीस का एक टुकड़ा साथ ले जाने से उन्हें प्लेग रोकने में मदद मिल सकती है. ऐसा इसलिए था क्योंकि सुगंध हवा की गंध को ढक लेती थी, जिसे प्लेग का कारण माना जाता था.
सेक्सपॉवर और अन्य दवाओं में भी इस्तेमालइस पदार्थ का भोजन का स्वाद बढ़ाने के और कुछ देशों में इसे सेक्स पावर बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. मध्य युग के दौरान यूरोपीय लोग सिरदर्द, सर्दी, मिर्गी और अन्य बीमारियों के लिए दवा के रूप में एंबरग्रीस का उपयोग करते थे.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: Gold, Kanpur perfume trader raided, Vomitting, Whale sharkFIRST PUBLISHED : September 08, 2022, 11:43 IST



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