Uttar Pradesh

योगी और मोहन भागवत की मुलाकात, 2027 चुनाव का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए

लखनऊ में सीएम योगी और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच 40 मिनट की मुलाकात ने 2027 के चुनाव की बिसात बिछा दी है. इसमें हिंदुत्व, सामाजिक समरसता, जातिगत दीवारों को तोड़ने और 2 लाख संघ कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर चर्चा हुई. इसका उद्देश्य विपक्ष के पीडीए अभियान को काटते हुए उत्तर प्रदेश में फिर से भारी बहुमत हासिल करना है.

लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में बुधवार शाम जो हलचल हुई, उसने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई सरगर्मी पैदा कर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई. कहने को तो यह संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़ी मुलाकात थी, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की ‘नींव’ माना जा रहा है. सूत्रों की मानें तो इस बैठक में हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने और विपक्ष के ‘पीडीए’ कार्ड को फेल करने की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है.

इस मुलाकात का सबसे अहम पहलू 2027 के चुनावों के लिए रोडमैप तैयार करना था. सीएम योगी अक्सर काशी, अयोध्या और मथुरा की बात करते हैं, जिसे अब संघ के साथ मिलकर ग्राउंड लेवल पर ले जाने की तैयारी है. संघ प्रमुख ने हाल ही में ‘हम सब हिंदू हैं’ की जो बड़ी लकीर खींचने की बात कही है, वह सीधे तौर पर जातिगत दीवारों को गिराने की कोशिश है. चर्चा है कि संघ के 2 लाख कार्यकर्ताओं को उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. ये कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचेंगे और हिंदुत्व की लहर को फिर से जागृत करेंगे.

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने और विपक्ष के ‘पीडीए’ कार्ड को फेल करने की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है. इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में फिर से भारी बहुमत हासिल करना है. यह बैठक संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़ी थी, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की ‘नींव’ माना जा रहा है.

इस बैठक के बाद, सियासी गलियारों में नई सरगर्मी देखी जा रही है. सूत्रों की मानें तो संघ के 2 लाख कार्यकर्ताओं को उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. ये कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचेंगे और हिंदुत्व की लहर को फिर से जागृत करेंगे.

यह बैठक संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़ी थी, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की ‘नींव’ माना जा रहा है. इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में फिर से भारी बहुमत हासिल करना है.

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