Uttar Pradesh

यहां एक ही पत्थर कटाकर बना दिया विशालकाय मंदिर, हजारों साल भी बाद जस का तस

Agency:News18 Uttar PradeshLast Updated:January 21, 2025, 21:37 ISTMaa Kundvasi Mandir Sonbhadra : तीन ओर से MP से घिरा ये मंदिर न केवल प्रदेश के अंतिम जिले में है बल्कि इसे यूपी का आखिर गांव भी कह सकते हैं. X

गजब की है इस मंदिर की बनावट, अनोखा है इतिहाससोनभद्र. आपने दुनिया में कई मंदिरों की कहानियां और कथाएं सुनी होगी, जो अपने आप में रोचक और ऐतिहासिक होंगी. ऐसा ही एक मंदिर है जिसकी अद्भुत बनावट के कारण उसे प्रत्यक्ष चमत्कार कहा जाता है. यूपी के आखिरी जनपद सोनभद्र का मां कुंडवासी धाम, जहां की कहानियां और कथाएं आपको अभिभूत कर देंगी. इस मंदिर का अपना अनोखा इतिहास है. ये मंदिर न केवल प्रदेश के अंतिम जिले में है बल्कि इसे यूपी का आखिर गांव भी कह सकते हैं. यानी यहां के बाद यूपी समाप्त हो जाता है. मध्य प्रदेश की सीमा से महज एक किलोमीटर पहले मां कुंडवासी का धाम है. ये स्थान तीन तरफ से मध्य प्रदेश से घिरा है.

राजा के आया सपना

कहा जाता है कि कई सौ वर्ष पहले राजा बालेंदु को मां कुंडवासिनी का स्वप्न आया. माता ने उनसे कहा कि हमें इस कुंड से निकाल कर हाथी पर ले चलो. जहां हाथी बैठ जाए वहीं मेरी स्थापना करवा देना. राजा ने माता के स्वप्न में दिए आदेश का पालन करते हुए ऐसा ही किया. खास बात ये है कि उस मंदिर को एक ही पत्थर से निर्मित कराया गया. उस वक्त मंदिर में एक ही द्वारा लगाया गया था. आज मां के दरबार में अत्यधिक भीड़ होने से एक ही द्वारा से दर्शन करने में कठिनाई होती है. नवरात्रि में दर्शन की दिक्कत बढ़ जाती है. मंदिर में दूसरे द्वारा को तब से आज तक कई बार खोलने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली.

बड़ी मान्यता

द्वार न खुलने के पीछे लोग मां का चमत्कार मानते हैं. लोगों का कहना है कि जब भी ऐसा प्रयास किया गया तो कोई न कोई बाधा उत्पन्न हुई. मशीनरी का प्रयोग होता है तो मशीन खराब हो जाती है. लोगों का कहना है कि मां को मंजूर नहीं कोई दूसरा द्वार खोला जाए. कुछ लोगों का ये भी मानना है कि एक ही पत्थर होने से पूरा मंदिर हिलने लगता है. जिस कारण भी द्वार खोलने में सफलता नहीं मिल पाई है. इस मंदिर की यहां बड़ी मान्यता है.
Location :Sonbhadra,Uttar PradeshFirst Published :January 21, 2025, 21:37 ISThomeuttar-pradeshहजारों वर्ष पहले एक ही विशाल काय पत्थर को कटाकर दे दिया गया भव्य मंदिर का स्वरूप।

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