Uttar Pradesh

ये घर है या जिला? दो रसोई में बनता है चार पीढ़ियों का खाना, राशन देखते ही चौंक जाते हैं लोग

आज के दौर में, जब संयुक्त परिवार की अवधारणा धीरे-धीरे खत्म हो रही है, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक ऐसा परिवार है जो न केवल इस परंपरा को जीवित रखे हुए है, बल्कि इसे एक मिसाल बना रहा है. घुसगवां गांव में रहने वाले श्याम सिंह का परिवार इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. इस परिवार में चार पीढ़ियों के 64 सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं. इतने बड़े परिवार का खाना दो रसोई में बनता है और उनका राशन इतना अनोखा है कि जानकर आप हैरान रह जाएंगे. यह परिवार न केवल एकता का प्रतीक है बल्कि यह भी दिखाता है कि प्यार और समझदारी से कोई भी चुनौती आसान हो सकती है.

चार पीढ़ियों का अनोखा संगमश्याम सिंह के नेतृत्व में यह परिवार चार पीढ़ियों को एक साथ जोड़े हुए है. परिवार में बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक सभी शामिल हैं. श्याम सिंह और उनके भाइयों ने संयुक्त परिवार की संस्कृति को जीवित रखा है, जो आज के आधुनिक युग में दुर्लभ है. परिवार के सभी महत्वपूर्ण निर्णय श्याम सिंह लेते हैं और सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं. परिवार में धीर सिंह, नेम सिंह, सत्येंद्र सिंह, ध्यान सिंह, और अनुराग जैसे सदस्य शामिल हैं, जिनके बच्चे और पोते-पोतियां भी इस घर का हिस्सा हैं. यह परिवार एकता और सहयोग का ऐसा उदाहरण है कि इसे देखकर हर कोई प्रेरित हो जाता है.

दो रसोई, एक परिवारइतने बड़े परिवार का खाना बनाना कोई आसान काम नहीं है. इसलिए परिवार ने दो रसोई बनाई हैं, जहां महिलाएं मिलकर खाना बनाती हैं. परिवार की बहुएं, जैसे अनुराग की पत्नी नीलम, सत्येंद्र की पत्नी सीमा और ध्यान सिंह की पत्नी मिथलेश, खाना बनाने से लेकर घर की साफ-सफाई तक की जिम्मेदारी संभालती हैं. वहीं, बुजुर्ग महिलाएं जैसे धीर सिंह की पत्नी नन्हीं देवी और नेम सिंह की पत्नी पुष्पा देवी, रसोई में कमी न हो, इसका ध्यान रखती हैं और जरूरत पड़ने पर मदद करती हैं. खास बात यह है कि खाना तैयार होने के बाद पूरा परिवार एक साथ बैठकर भोजन करता है, जो उनकी एकता को और मजबूत करता है.

राशन की हैरान करने वाली कहानी64 लोगों के परिवार का राशन अपने आप में एक बड़ी कहानी है. इतने बड़े परिवार के लिए हर महीने सैकड़ों किलो अनाज, दाल, चावल, तेल और मसाले चाहिए. परिवार हर महीने राशन की दुकान से पात्र गृहस्थी राशन कार्ड के तहत अनाज लेता है लेकिन बाकी सामान थोक में खरीदा जाता है. श्याम सिंह बताते हैं कि राशन की खरीदारी और उसका प्रबंधन एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे परिवार के पुरुष और महिलाएं मिलकर संभालते हैं. राशन की मात्रा इतनी बड़ी होती है कि कई बार लोग इसे देखकर हैरान रह जाते हैं. फिर भी, परिवार में कभी कमी नहीं होती क्योंकि सभी मिलकर खर्च और खपत का हिसाब रखते हैं.

संयुक्त परिवार की चुनौतियां और आनंदइतने बड़े परिवार में रहना आसान नहीं है. छोटी-मोटी नोक-झोक और मतभेद तो होते ही हैं लेकिन परिवार का कहना है कि प्यार और आपसी समझ से हर समस्या हल हो जाती है. श्याम सिंह बताते हैं, “हमारा परिवार एक ट्रेन की तरह है, जिसमें हर डिब्बा अलग है, लेकिन सभी एक साथ चलते हैं.” परिवार के बच्चे भी इस माहौल में बड़े होकर एकता और सहयोग का मूल्य सीखते हैं. वहीं, बुजुर्गों को बच्चों और पोते-पोतियों का साथ मिलता है, जो उनकी जिंदगी को खुशहाल बनाता है.

क्या कहता है समाज?यह परिवार न केवल गांव में बल्कि पूरे शाहजहांपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया पर लोग इसे संयुक्त परिवार की मिसाल बता रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, “ऐसे परिवार आजकल कहाँ मिलते हैं? यह हमारी संस्कृति की ताकत है.” लेकिन कुछ लोग इसे अव्यवहारिक भी मानते हैं क्योंकि आधुनिक जीवनशैली में लोग छोटे परिवारों को प्राथमिकता देते हैं. फिर भी यह परिवार साबित करता है कि एकता और प्यार से कोई भी चुनौती छोटी हो जाती है.

आगे की राहश्याम सिंह का परिवार इस परंपरा को आगे भी जारी रखना चाहता है. वे चाहते हैं कि उनकी अगली पीढ़ियां भी संयुक्त परिवार की इस संस्कृति को अपनाएं. यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपनी जड़ों को भूल रहे हैं? शाहजहांपुर का यह परिवार हमें याद दिलाता है कि परिवार की ताकत ही हमारी असली संपत्ति है. क्या आप भी ऐसे परिवार का हिस्सा बनना चाहेंगे?

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