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Yashasvi elder brother left cricket for 7 years for family now scored fifty for Tripura Tejasvi Jaiswal story | बहन के लिए सात साल तक टाला सपना, यशस्‍वी का भाई वापस क्रिकेट की दुनिया में लौटा



Yashasvi Jaiswal Brother Tejasvi Jaiswal Story: भारत के स्टार बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने कम ही उम्र में अपना नाम बना लिया है. वह टीम इंडिया के अहम खिलाड़ियों में एक बन गए हैं. टेस्ट और टी20 फॉर्मेट में उनका जलवा देखने को मिल रहा है. वह पहली बार ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए हैं और वहां भी अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे. इसी बीच, उनके भाई तेजस्वी जायसवाल भी क्रिकेट मैदान पर लौट आए हैं. उन्होंने पिछले हफ्ते में त्रिपुरा के लिए रणजी ट्रॉफी में अपना पहला फर्स्ट क्लास अर्धशतक लगाया.
यशस्वी ने बड़े भाई को किया मैसेज
यशस्वी ने इसके बाद अपने 27 वर्षीय भाई के लिए खास मैसेज भेजा. उन्होंने मैसेज में लिखा, “तूने सब के लिए किया, अपने सपने को छोड़ा, बहुत त्याग किया, अभी तुम्हारा टाइम है, एन्जॉय करो.” तेजस्वी के लिए यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा. उन्होंने परिवार के लिए काफी त्याग किया. अब उन्हें जब क्रिकेट में सफलता हासिल हुई है तब छोटे भाई ने खास मैसेज भेजकर दिल जीत लिया.
भदोही से मुंबई और फिर दिल्ली
दरअसल, 2012 में उत्तर प्रदेश के भदोही में एक हार्डवेयर की दुकान के मालिक के दोनों बेटे क्रिकेटर बनने के लिए मुंबई चले गए. वे मुंबई के आजाद मैदान में ग्राउंड्समैन के टेंट में काम करते थे, लेकिन उनमें से केवल एक ही खेल को आगे बढ़ाने का खर्च उठा सकता था. इसलिए 17 साल की उम्र में तेजस्वी ने क्रिकेट छोड़ दिया, ताकि यशस्वी का भारत का क्रिकेटर बनने का सपना जिंदा रहे. यशस्वी ने एज-ग्रुप क्रिकेट में रिकॉर्ड तोड़ना शुरू किया और फिर भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई. दूसरी ओर,  तेजस्वी दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन में सजावटी लाइट बेचने वाले एक स्टोर में सेल्समैन के रूप में काम करने लगे थे. वह यशस्वी को पॉकेट मनी भेजते थे. तेजस्वी ने अपनी दो बड़ी बहनों की शादी भी करवाई.
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धोखाधड़ी के आरोपों का करना पड़ा सामना
आर्थिक संकट के अलावा तेजस्वी को मुंबई में क्रिकेट खेलते समय उम्र-धोखाधड़ी के आरोपों का भी सामना करना पड़ा था. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “मैंने हैरिस शील्ड में एक गेम खेला और सात विकेट लिए. फिर लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि मेरी उम्र सत्यापन की समस्या है. मुझे डेढ़ साल तक बेंच पर बैठना पड़ा. यशस्वी बहुत अच्छा कर रहा था और मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से उसकी संभावनाओं पर असर पड़े. वैसे भी मुंबई हम दोनों के लिए बहुत महंगा था. हम दोनों के लिए दिन में दो बार खाना जुटाना मुश्किल हो रहा था. उस समय यशस्वी के कोच ज्वाला सर भी जिंदगी में नहीं आए थे.”
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इस तरह त्रिपुरा क्रिकेट टीम में मिली एंट्री
तेजस्वी वहां से भदोही वापस आ गए. उनका क्रिकेट छूट गया. भाई को जब आईपीएल का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया और बहनों की शादी हो गई तो उनका जीवन आसान हो गया. हालांकि, छोटे भाई यशस्वी ने ही उन्हें फिर से क्रिकेट खेलने के लिए कहा. तेजस्वी ने फिर कड़ी मेहनत की और त्रिपुरा के लिए मेघालय के खिलाफ डेब्यू किया. 2014 से 2021 तक वह क्रिकेट से दूर रहे. वह त्रिपुरा गए. उन्होंने वहां कॉलेज में एडमिशन कराया, लोकल क्रिकेट में हिस्सा लिया और बेहतर प्रदर्शन करके त्रिपुरा की टीम में जगह बनाई. तेजस्वी को इस बात की खुशी होती है कि कोई उन्हें यह कहता है, ”देखो यशस्वी जायसवाल का बड़ा भाई जा रहा है.”



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