WHO के अनुसार, 2020 के अंत तक दुनियाभर में करीब 3 करोड़ 70 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित रहे. लेकिन इससे बड़ी चिंता यह है कि अभी तक इसका कोई इलाज हमारे पास नहीं है. हालांकि, एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी के द्वारा शरीर में एचआईवी वायरस को फैलने से रोकने की कोशिश की जाती है. लेकिन एक जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, एक एचआईवी मरीज का शरीर एंटी-वायरल दवाओं के बिना ही ‘इंफेक्शन फ्री’ हो गया है. जिसने ना सिर्फ शोधकर्ताओं, बल्कि पूरे मेडिकल जगत को चौंका कर रख दिया है.
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जानिए क्या है पूरा मामला…TIME वेबसाइट के मुताबिक, Annals of Internal Medicine में सोमवार को छपी रिपोर्ट के मुताबिक अर्जेंटीना के एस्पैरांझा शहर की रहने वाली 31 वर्षीय महिला बिना ट्रीटमेंट के संक्रमण मुक्त हो गई है. दरअसल, इस महिला मरीज को 2013 में एचआईवी इंफेक्शन की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद उन्होंने सिर्फ प्रेग्नेंसी के दौरान शिशु को इंफेक्शन से बचाने के लिए सिर्फ 6 महीने तक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ली थी. लेकिन, हाल ही में हुए अध्ययन में उनके ब्लड में वायरस का कोई नमूना नहीं दिखा है. जिसके बाद शोधकर्ताओं ने यह मान लिया कि उनका इम्यून सिस्टम शरीर में एचआईवी वायरस के भंडारों की पहचान करके उसे प्राकृतिक रूप से नष्ट करने के काबिल हो गया है. जिसके कारण शरीर में वायरस का फैलना बंद हो गया है.
इस स्टडी को लीड करने वाली Dr. Xu Yu ने कहा, “अभी तक ऐसा कोई तरीका मौजूद नहीं है, जिसकी मदद से जांच करके ये कहा जाए कि शरीर में छोटा-सा भी एचआईवी वायरस नहीं बचा है. हालांकि 1.5 बिलियन ब्लड और टिश्यूज सेल्स की जांच करने के बाद हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि मरीज नैचुरल इम्युनिटी की मदद से ‘स्टेरलाइजिंग क्योर’ तक पहुंच गई है.” उन्होंने आगे बताया कि, अभी तक मौजूद एंटी-एचआईवी ड्रग्स वायरस के स्तर को सिर्फ इस हद तक कम कर सकते हैं कि उनका पता ना चल पाए. लेकिन ऐसा नहीं होता कि, वायरस का भंडार खत्म हो जाए और शरीर बिल्कुल वायरस-फ्री हो जाए.
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इस तरह सिर्फ दो ही मरीज हो पाए हैं ठीकमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘एस्पैरांझा पेशेंट’ से पहले सिर्फ एक और मरीज नैचुरल तरीके से इंफेक्शन-फ्री हुई थी. इनकी पहचान 67 वर्षीय महिला Loreen Willenberg के रूप में की गई थी. हालांकि, इनके अलावा दो और लोग एचआईवी संक्रमण मुक्त हुए हैं. लेकिन उनमें यह बदलाव कैंसर के इलाज के दौरान बोन मैरो ट्रांस्पलांट की वजह से देखा गया था. जिसमें स्वस्थ मरीज से एचआईवी वायरस को ब्लॉक करने वाली कुछ इम्यून सेल्स को मरीज में प्रत्यारोपित किया गया था.
यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.
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