शाश्वत सिंह/झांसी. मल्लखंब भारत का एक पारंपरिक खेल है. इसे सदियों से भारत के विभिन्न हिस्सों में खेला जाता रहा है. यह खेल शारीरिक ताकत और फुर्ती के साथ मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में मददगार होता है. विडंबना यह है कि आज भी इसे वैश्विक स्तर पर पहचान नहीं मिली है. लेकिन, झांसी की एक संस्था है जो पिछले कई सालों से मल्लखंब के खिलाड़ियों को तैयार कर रही है और इस खेल को विश्व स्तर पर ले जाने का प्रयास कर रही है.झांसी का एमेच्योर मल्लखंब एसोसिएशन साल 2011 से न्यू एरा पब्लिक स्कूल में युवाओं और बच्चों को मल्लखंभ की ट्रेनिंग दे रहा है. यह 5 साल के बच्चे से लेकर 18 साल के युवा तक मल्लखंब की प्रैक्टिस करते हैं. इस संस्था को मल्लखंब की नर्सरी भी कहा जाता है. यहां से कई खिलाड़ी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं. कुछ खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी पदक पा चुके हैं.ओलंपिक खेलों में मल्लखंब को किया जाए शामिलपिछले एक दशक से झांसी के युवाओं को मल्लखंब की ट्रेनिंग देने वाले अनिल पटेल बताते हैं कि मल्लखंब के प्रति युवाओं का जोश लगातार बढ़ता जा रहा है. साल 2011 में अलख घोष ने इस संस्था को शुरू करने की अनुमति दी थी. इसके बाद से यह संस्था लगातार खिलाड़ियों को तैयार कर रही है. यहां के खिलाड़ी विभिन्न मंचों पर पदक जीत चुके हैं. हमारी कोशिश है कि मल्लखंब को ओलंपिक खेलों में शामिल किया जाए और हमारे बच्चे वहां भी मेडल जीत कर लाएं..FIRST PUBLISHED : June 15, 2023, 13:38 IST
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