Last Updated:January 28, 2026, 04:55 ISTWheat crop irrigation : ज्यादा पानी से खेत में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे जड़ सड़ने का खतरा रहता है. कम पानी देने से पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है. दूसरी सिंचाई के साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए. इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और बालियों का विकास मजबूत होता है. रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि उर्वरक डालते समय मिट्टी की नमी का ध्यान रखना भी जरूरी है. पौधों की बढ़वार रुक सकती है.रायबरेली. गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसल है. इसकी अच्छी पैदावार के लिए समय पर और संतुलित सिंचाई बेहद जरूरी है. गेहूं की फसल में दूसरी सिंचाई का विशेष महत्त्व होता है, क्योंकि इसी चरण में बालियों का विकास और दानों की संख्या तय होने लगती है. यदि इस समय थोड़ी भी लापरवाही बरती जाए तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है. कृषि के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद) लोकल 18 से बताते हैं कि दूसरी सिंचाई के दौरान कुछ अहम बातों का ध्यान रखकर किसान बेहतर उपज हासिल कर सकते हैं. किसानों को मौसम की जानकारी पर भी नजर रखनी चाहिए. यदि बारिश की संभावना हो तो सिंचाई कुछ समय के लिए टालना फायदेमंद होता है. सही समय पर की गई दूसरी सिंचाई गेहूं की फसल को स्वस्थ बनाती है और अच्छी पैदावार का आधार तैयार करती है.
बुवाई के कितने दिन बाद सिंचाई
शिव शंकर वर्मा के मुताबिक, गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के लगभग 40 से 45 दिन बाद करनी चाहिए. इस अवस्था को गांठ बनने या टिलरिंग का समय भी कहा जाता है. इस समय पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और नई टहनियों का विकास तेजी से होता है. यदि इस समय खेत में नमी की कमी रहती है तो पौधों की बढ़वार रुक जाती है, जिससे दानों की संख्या कम हो सकती है. दूसरी सिंचाई के दौरान खेत में पानी की मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए. न तो अधिक पानी भरना चाहिए और न ही कम पानी देना चाहिए. हल्की और समान रूप से सिंचाई करना सबसे बेहतर माना जाता है.
पहले खरपतवार नियंत्रण जरूरी
इस समय खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी होता है. दूसरी सिंचाई से पहले या बाद में निराई-गुड़ाई करने से खेत में हवा का संचार अच्छा होता है और पोषक तत्व पौधों तक आसानी से पहुंचते हैं. यदि खरपतवार अधिक हो तो वे नमी और पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं, जिससे गेहूं की फसल कमजोर हो जाती है. दूसरी सिंचाई के साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए. इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और बालियों का विकास मजबूत होता है. हालांकि उर्वरक डालते समय मिट्टी की नमी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Rae Bareli,Uttar PradeshFirst Published :January 28, 2026, 04:55 ISThomeagricultureकब करें गेहूं में दूसरी सिंचाई, कम पानी ठीक नहीं, ज्यादा भी खतरनाक, जानें

