कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी स्थिति है, जिसमें दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है. भारत में हर साल लगभग 7 लाख लोग इसकी वजह से अपनी जान गंवा देते हैं, जो सभी मृत्युओं का करीब 10% है. यह स्थिति किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है और अगर तुरंत कार्रवाई न की जाए, तो मरीज की जान कुछ ही मिनटों में जा सकती है. ऐसे में, यह जानना बेहद जरूरी है कि अगर आपके आसपास किसी को कार्डियक अरेस्ट हो जाए तो क्या करना चाहिए. हाल ही में हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस पर लाइफ सेविंग टिप्स शेयर किए हैं, जो हर किसी को जानने चाहिए.
कार्डियक अरेस्ट क्या है?कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल के पावर सिस्टम में गड़बड़ी के कारण यह खून पंप करना बंद कर देता है. इससे ब्रेन और अन्य अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे मरीज बेहोश हो सकता है या मृत्यु हो सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस स्थिति में हर सेकंड कीमती होता है और प्राथमिक उपचार से जान बचाई जा सकती है.
तुरंत क्या करें?
1. तुरंत इमरजेंसी सेवा को कॉल करें: अगर आपको किसी के कार्डियक अरेस्ट का संदेह हो, तो सबसे पहले 108 या 102 नंबर पर कॉल करें. अगर संभव हो, तो किसी अन्य व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दें, ताकि आप मरीज की मदद पर ध्यान दे सकें.
2. सीपीआर शुरू करें: कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) जीवन बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है. अगर आप ट्रेंड हैं, तो मरीज की छाती को 100-120 बार प्रति मिनट की गति से दबाएं. हाथों को छाती के केंद्र में रखें और प्रत्येक दबाव में छाती को 5-6 सेंटीमीटर नीचे तक दबाएं. सीपीआर तब तक जारी रखें जब तक मेडिकल टीम न पहुंच जाए. अगर ट्रेंड नहीं है, तो भी छाती दबाना शुरू करें.
3. एईडी का उपयोग करें: अगर आसपास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) उपलब्ध हो, तो इसे तुरंत इस्तेमाल करें. यह डिवाइस दिल की लय को बहाल करने के लिए इलेक्ट्रिक शॉक देता है. AED आमतौर पर सार्वजनिक स्थानों जैसे मॉल और हवाई अड्डों पर मिलता है. इसे इस्तेमाल करना आसान है और डिवाइस खुद निर्देश देता है.
4. मरीज को अकेला न छोड़ें: मरीज को होश आने तक निगरानी करें. अगर सांस या नाड़ी वापस आ जाए, तो भी उसे तकलीफ से बचाने के लिए आराम की स्थिति में रखें और चिकित्सा सहायता का इंतजार करें.
एक्सपर्ट की सलाहमेदांता हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश गुप्ता बताते हैं कि कार्डियक अरेस्ट में पहले 10 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. सीपीआर और डीफिब्रिलेशन से मरीज की जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है. लोग को डरने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. वे सलाह देते हैं कि हर व्यक्ति को बेसिक CPR ट्रेनिंग लेनी चाहिए, जो आजकल कई संगठनों द्वारा मुफ्त या कम लागत पर उपलब्ध है.
कार्डियक अरेस्ट के रिस्क फैक्टर और बचावहाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल कार्डियक अरेस्ट के प्रमुख कारण हैं. नियमित व्यायाम, बैलेंस डाइट और तनाव प्रबंधन से इस खतरे को कम किया जा सकता है.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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