Last Updated:January 13, 2026, 04:53 ISTWeight control tips : भारत में चावल केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा है. आयुर्वेद में चावल को एक ‘सात्विक आहार’ का दर्जा दिया गया है, जो न केवल शरीर को तत्काल ऊर्जा देता है, बल्कि मन को शांत रखने में भी मदद करता है. अगर आप वजन बढ़ने के डर से चावल छोड़ चुके हैं, तो यह खबर आपके लिए है. आयुर्वेद और विज्ञान की मदद से जानें उन खास किस्मों के बारे में, जिन्हें खाकर आप बिना मोटापा बढ़ाए अपनी क्रेविंग्स शांत कर सकते हैं. अगर आप सादा सफेद या बासमती चावल खाना पसंद करते हैं, तो आयुर्वेद इसे पूरी तरह बंद करने की सलाह नहीं देता. भारत में चावल केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा है. अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही कोई व्यक्ति वजन घटाने की यात्रा शुरू करता है. सबसे पहले उसकी थाली से चावल को ‘दुश्मन’ मानकर हटा दिया जाता है, लेकिन क्या वास्तव में चावल मोटापा बढ़ाता है? आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानते. आयुर्वेद में चावल को एक ‘सात्विक आहार’ का दर्जा दिया गया है, जो न केवल शरीर को तत्काल ऊर्जा देता है, बल्कि मन को शांत रखने में भी मदद करता है. समस्या चावल में नहीं, बल्कि उसे खाने के तरीके और चावल की किस्म में है. आइए जानते हैं चावल की उन वैराइटीज के बारे में, जिन्हें खाकर आप टेंशन-फ्री रह सकते हैं. सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस बहुत कम प्रोसेस्ड होता है. इसमें चावल की ऊपरी परत सुरक्षित रहती है, जिसमें भरपूर फाइबर, विटामिन बी और मिनरल्स होते हैं. विज्ञान की भाषा में इसका ‘ग्लाइसेमिक लोड’ कम होता है, जिससे यह खून में शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करता है. इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे आप ‘ओवरईटिंग’ से बच जाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google वजन कम करने वालों के लिए रेड राइस (लाल चावल) एक वरदान है. इसका लाल रंग इसमें मौजूद ‘एंथोसायनिन’ नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के कारण होता है. आयुर्वेद के अनुसार, रेड राइस रक्त को शुद्ध करता है और शरीर की आंतरिक गर्मी को संतुलित करता है. यह आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे शरीर में जमा फैट ऊर्जा के रूप में जलने लगता है. प्राचीन काल में ब्लैक राइस को बहुत कीमती माना जाता था. इसमें अन्य चावलों की तुलना में सबसे अधिक एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर पाए जाते हैं. यह न केवल वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करता है, बल्कि शरीर की सूजन को कम कर हृदय रोगों से भी बचाता है. कैलोरी में कम और पोषण में उच्च होने के कारण यह फिटनेस प्रेमियों की पहली पसंद है. यदि आप सादा सफेद या बासमती चावल खाना पसंद करते हैं, तो आयुर्वेद इसे पूरी तरह बंद करने की सलाह नहीं देता. बासमती चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्य सफेद चावल से कम होता है. वजन नियंत्रित रखने के लिए इसे हमेशा प्रचुर मात्रा में दाल, हरी सब्जियों और सलाद के साथ लें. चावल के साथ प्रोटीन और फाइबर का संयोजन इसे पचने में आसान बनाता है और फैट जमा होने से रोकता है. चावल छोड़ना समाधान नहीं है, बल्कि सही किस्म का चुनाव करना बुद्धिमानी है. पुराने समय में लोग भारी मात्रा में चावल खाते थे और फिर भी फिट रहते थे, क्योंकि वे अनपॉलिश्ड और स्थानीय चावल का उपयोग करते थे. आज ही अपनी डाइट में ब्राउन या रेड राइस शामिल करें और बिना किसी ग्लानि के अपने पसंदीदा भोजन का आनंद लें.न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :January 13, 2026, 04:53 ISThomelifestyleकितना भी खाएं चावल, ये 5 वैरायटी बढ़ने नहीं देगी वजन, एक गलती पड़ रही भारी
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