गोरखपुर: जहां अधिकतर लोग सालभर व्यापार करते हैं, वहीं गोरखपुर के अजय गुप्ता का काम थोड़ा अलग और खास है. अजय साल में सिर्फ एक बार, वो भी एक महीने के लिए, पारंपरिक लड्डुओं का कारोबार करते हैं. यह काम हर साल 15 दिसंबर से शुरू होकर मकर संक्रांति यानी खिचड़ी तक चलता है. इसी एक महीने में अजय और उनका पूरा परिवार मिलकर लाखों रुपये की कमाई कर लेता है.
घर ही बन जाती है फैक्ट्री
इस कारोबार की सबसे खास बात यह है कि, लड्डू पूरी तरह घर में ही तैयार किए जाते हैं. अजय के पिता, माता, पत्नी और बहन, पूरा परिवार इस काम में जुट जाता है. सुबह से शाम तक घर में लड्डू बनाने की चहल-पहल रहती है. हर दिन लगभग 50 से 60 किलो लड्डू तैयार होते हैं, जिन्हें बाद में बाजार में भेजा जाता है.
तीन तरह के ट्रेडिशनल लड्डू
अजय गुप्ता बताते हैं कि उनके यहां तीन तरह के पारंपरिक लड्डू बनाए जाते हैं. पहला लड्डू गुड़ और भुजा (भुने हुए अनाज) से तैयार किया जाता है, जो ठंड के मौसम में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. दूसरा लड्डू काले तिल से बनता है, जिसकी मांग मकर संक्रांति के आसपास काफी बढ़ जाती है. तीसरा लड्डू रामदाने से तैयार किया जाता है, जिसे लोग उपवास और धार्मिक अवसरों पर खास तौर पर लेते हैं.
30 रुपये से 500 रुपये तक दाम
इन लड्डुओं की कीमत 30, 40 रुपये से शुरू होकर 500 रुपये तक जाती है. कीमत लड्डू के प्रकार और पैकिंग पर निर्भर करती है. घर में तैयार होने के बाद इन्हें प्लास्टिक पैकिंग में बंद किया जाता है और फिर स्थानीय बाजारों में या बल्क क्वांटिटी में ऑर्डर के जरिए बेचा जाता है.
प्रसाद के रूप में भी खास पहचान
अजय बताते हैं कि, ये लड्डू सिर्फ खाने के लिए ही नहीं, बल्कि प्रसाद के रूप में भी लोग लेते हैं. मकर संक्रांति, पूजा-पाठ और खिचड़ी के अवसर पर इनकी जबरदस्त डिमांड रहती है. यही वजह है कि इस एक महीने में ही सारा स्टॉक तैयार कर लिया जाता है.
सीजन खत्म, काम भी खत्म
मकर संक्रांति के बाद यह कारोबार पूरी तरह बंद हो जाता है. इसके बाद अजय और उनका परिवार दूसरे कामों में लग जाता है. अजय कहते हैं कि, यह उनका पारिवारिक और पारंपरिक काम है, जो न सिर्फ कमाई देता है बल्कि परिवार को एक साथ जोड़ने का भी काम करता है.

