कानपुर के घुड़सवारी प्रेमियों के लिए खास तौर पर महिलाओं के लिए यह खबर किसी बड़े रोमांच से कम नहीं है. अब घुड़सवारी सीखने के लिए न तो किसी महंगे प्राइवेट क्लब की जरूरत होगी और न ही भारी-भरकम फीस की चिंता. शहर की पुलिस अपने शाही और ताकतवर घोड़ों के साथ आमजन को घुड़सवारी सिखाने जा रही है. पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर इस अनोखी पहल की शुरुआत की जा रही है. जिसमें सदस्यता लेकर लोग रोजाना करीब 45 मिनट तक पुलिस अस्तबल में घुड़सवारी का प्रशिक्षण ले सकेंगे.
यातायात पुलिस कार्यालय के पीछे बना यह पुलिस अस्तबल सिर्फ एक अस्तबल नहीं, बल्कि घोड़ों की एक शानदार और अनुशासित दुनिया है. यहां मौजूद 24 घोड़े अपनी खूबसूरती, ताकत और ट्रेनिंग के लिए जाने जाते है. इन घोड़ों पर हर साल करीब डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च आता है, जिससे इनके रखरखाव और ट्रेनिंग का स्तर बेहद ऊंचा है. यही वजह है कि ये घोड़े किसी राजसी ठाठ से कम नहीं दिखते.
अपनी ताकत और दमखम दिखा चुके है ये घोड़ेपुलिस अस्तबल में मौजूद 24 घोड़ों में से 9 घोड़े विदेशी थायरो ब्रिड नस्ल के हैं. जिनका संबंध इंग्लैंड, जापान, अमेरिका और फ्रांस जैसी जगहों से है. चेतक, रणवीर, नाज, अकबर, हिमालय, पार्थ और सूर्या जैसे नामों वाले ये घोड़े कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी ताकत और दमखम दिखा चुके है. अब तक ये घोड़े कुल 19 मेडल जीत चुके है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन घोड़ों की कीमत 40 से 50 लाख रुपये तक है. यानी अब कानपुरवासी लाखों के रॉयल घोड़ों पर घुड़सवारी का अनुभव ले सकेंगे.
ट्रेनिंग सिर्फ महिलाओं को दी जाएगीशुरुआती दौर में यह ट्रेनिंग सिर्फ महिलाओं को दी जाएगी. जिसको लेकर तैयारियां तेज कर दी गई है. अधिकारी खुद इसकी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे है. यह प्रशिक्षण केवल शौक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से डिजाइन किया गया है. बेहतर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को आगे चलकर नेशनल लेवल प्रतियोगिताओं की तैयारी का भी मौका मिलेगा.
र्जुन नस्ल के घोड़े भी शामिल किए जाएंगेकमिश्नरेट पुलिस के अस्तबल में वैसे तो हर घोड़ा खास है. लेकिन चेतक, पार्थ, नाज, रणवीर, हिमालय, तुरंगी, इंद्रायाणी, शाहीन और सूर्या को ‘स्टार’ घोड़े माना जाता है. खुशी की बात यह भी है कि जल्द ही इस अस्तबल में बम ब्लास्ट और अर्जुन नस्ल के घोड़े भी शामिल किए जाएंगे. जिससे यह अस्तबल और भी खास बन जाएगा.
रोमांच और सशक्तिकरण का नया रास्तापुलिस अधिकारियों के अनुसार अल्टरनेट डे पर करीब 45 मिनट तक प्रशिक्षित घुड़सवारों द्वारा घुड़सवारी सिखाई जाएगी. शुरुआत में करीब 20 कैंडिडेट्स को शामिल किया जाएगा. फिलहाल फीस को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. लेकिन यह पहल निश्चित तौर पर कानपुर में महिलाओं के लिए आत्मविश्वास, रोमांच और सशक्तिकरण का नया रास्ता खोलेगी.

