Asaduddin Owaisi: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘बी टीम’ के आरोपों और विपक्षी घेराबंदी के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी नई बिसात बिछा दी है. आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी ने यूपी के पंचायत चुनावों को अपना ‘लिटमस टेस्ट’ बनाने का फैसला किया है. गांव-गांव सदस्यता अभियान, बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट और ग्राम पंचायत स्तर पर 121 सदस्यीय समितियों का गठन, ओवैसी की पार्टी अब केवल रैलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन का ढांचा खड़ा कर रही है. ओवैसी बंधुओं की इस सक्रियता ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं.
बूथ स्तर पर किलाबंदी, 121 सदस्यीय ‘स्पेशल टीम’AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के नेतृत्व में पार्टी ने इस बार रणनीति बदल दी है. हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक, पार्टी अब केवल शहरी क्षेत्रों नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों के हर बूथ पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है. इसके लिए हर ग्राम पंचायत में ग्राम अध्यक्ष की नियुक्ति की जा रही है. पार्टी ने 121 सदस्यीय विशेष समिति का फॉर्मूला तैयार किया है, जिसमें
100 सक्रिय सदस्य: जो घर-घर जाकर पार्टी की विचारधारा का प्रचार करेंगे.21 मुख्य सदस्य: जो चुनाव के दौरान बूथ प्रबंधन और रणनीति की देखरेख करेंगे.
शौकत अली के अनुसार, संगठन को जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक इतना मजबूत किया जा रहा है कि पार्टी आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सके. फिलहाल वह खुद अमरोहा में नुक्कड़ सभाओं के जरिए युवाओं को जोड़ रहे हैं.
मुस्लिम बाहुल्य जिलों पर ‘मजलिस’ की निगाहें
पार्टी आलाकमान असदुद्दीन ओवैसी खुद यूपी के पल-पल के घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं. रमजान के बाद इस अभियान को और धार दी जाएगी. AIMIM ने विशेष रूप से उन जिलों को चिन्हित किया है जहां मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका में है. इनमें शामिल हैं:
पश्चिमी यूपी: सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और बागपत.पूर्वी व मध्य यूपी:आजमगढ़, संभल और अमरोहा.
अकबरुद्दीन ओवैसी की चुनौती: ‘मिस्टर योगी, तैयार हो जाओ’हैदराबाद से लेकर यूपी तक सियासी पारा तब चढ़ गया जब ओवैसी के भाई और विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना के निजामाबाद में हुंकार भरी. उन्होंने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए कहा, ‘मिस्टर योगी, मैं यूपी आ रहा हूं, तैयार हो जाओ. अब यूपी में भी पार्टी का झंडा गाड़ेंगे.’ इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा तेज हो गई है कि क्या अकबरुद्दीन की एंट्री यूपी में ध्रुवीकरण को और तेज करेगी?
पिछले प्रदर्शन से सीख और नई चुनौतियां
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. पार्टी को कुल 4,50,929 वोट मिले (महज 0.49%). आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट पर शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ही अपनी जमानत बचा पाए थे, जिन्हें बाद में सपा ने अपनी पाले में कर लिया. यही कारण है कि इस बार पार्टी अपनी साख बचाने और प्रदर्शन सुधारने के लिए ‘इमोशनल कार्ड’ के बजाय ‘संगठनात्मक मजबूती’ पर ध्यान दे रही है.
महराजगंज में सदस्यता की लहरसंगठनात्मक विस्तार की कड़ी में महराजगंज के मेहदी मैरिज हॉल में एक बड़ी बैठक संपन्न हुई. जिला अध्यक्ष सरवर साहब ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी आगामी पंचायत चुनावों में समाज के वंचित और शोषित वर्गों की आवाज बनेगी. इस बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं ने ओवैसी की नीतियों पर भरोसा जताते हुए पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, जो इस बात का संकेत है कि मजलिस का आधार धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

