Uttar Pradesh

UP News: 1857 में यूपी का ये गांव बना था अंग्रेजों का कब्रगाह, 16 वीरों ने हंसकर दे दी थी जान

Last Updated:August 24, 2025, 16:47 ISTJaunpur News: हौज गांव जौनपुर ने 1857 की क्रांति में बालदत्त के नेतृत्व में अंग्रेज अफसरों का सामना किया, 16 वीर शहीद हुए. यहां शहीद स्मारक और 15 अगस्त को मेला आयोजित होता है.जौनपुर: भारत की आजादी का इतिहास केवल बड़े शहरों और मशहूर क्रांतिकारियों तक सीमित नहीं है. छोटे-छोटे गांवों के अदम्य साहस और बलिदान की भी इस इतिहास में बड़ी भूमिका रही है. जौनपुर के सिरकोनी ब्लॉक का हौज गांव उन्हीं गुमनाम वीरों की गाथा का हिस्सा है, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगाकर देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया. यह गांव सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता या सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं बल्कि 1857 की क्रांति में अपने अद्वितीय योगदान के लिए पूरे देश में जाना जाता है.

1857 की क्रांति में हौज गांव का साहस1857 में जब पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की लहर उठी, तब हौज गांव के जमींदार बालदत्त के दिल में भी आजादी की आग भड़क उठी. उन्होंने गांव के युवाओं को संगठित किया और अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की योजना बनाई. पांच जून 1857 को उन्हें सूचना मिली कि जौनपुर के सभी अंग्रेज अफसर अपने सुपरवाइजर के साथ वाराणसी जा रहे हैं. बालदत्त ने 100 से अधिक क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उन्हें रास्ते में घेर लिया.

इस मुठभेड़ में भयंकर संघर्ष हुआ और सभी अंग्रेज अफसर मारे गए. उनके शव पास ही दफन कर दिए गए. इस घटना की खबर फैलते ही अंग्रेजों में हड़कंप मच गया. पूरे इलाके में तलाशी और छानबीन शुरू हो गई. गवाहियों और सबूतों के आधार पर 15 क्रांतिकारियों को फांसी दी गई, जबकि बालदत्त को ‘काला पानी’ की कठोर सजा दी गई, जहां उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया.

शहीद स्मारक और सालाना आयोजन
इस गौरवगाथा को याद रखने के लिए 1986 में हौज गांव में शहीद स्मारक स्तंभ का निर्माण किया गया. जाफराबाद के तत्कालीन सपा विधायक जगदीश नारायण राय की पहल पर हर साल 15 अगस्त को यहां भव्य मेला आयोजित किया जाता है. इस मौके पर नेता, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी शहीदों को श्रद्धांजलि देने आते हैं.

आज भी हौज गांव का यह स्मारक और यहां की मिट्टी लोगों को यह याद दिलाती है कि आजादी केवल किताबों में लिखी कहानियों तक सीमित नहीं है. यह संघर्ष और बलिदान का परिणाम है, जिसे हमारे पूर्वजों ने अपने खून से सींचा है. यहां की हवाओं में अब भी वह जज़्बा मौजूद है, जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है—”आजादी मिली है, तो उसकी कीमत पहचानो, क्योंकि यह किसी ने हमें उपहार में नहीं दी, बल्कि लाखों ने अपनी जान देकर अर्जित की है.”न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।Location :Jaunpur,Uttar PradeshFirst Published :August 24, 2025, 16:47 ISThomeuttar-pradesh1857 में यूपी का ये गांव बना था अंग्रेजों का कब्रगाह, 16 वीर हुए थे शहीद

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