यूपी होमगार्ड परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
यूपी होमगार्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सबसे जरूरी है सही मार्गदर्शन और निरंतरता. एक्सपर्ट वी के रॉय सर का मानना है कि सफलता पाने के लिए बार-बार दिशा बदलने के बजाय एक ही शिक्षक के कॉन्सेप्ट को गहराई से समझना और उसी रणनीति पर टिके रहना बेहद अहम है. अधूरी तैयारी और बार-बार बदलाव अक्सर मेहनत को कमजोर कर देते हैं, जबकि स्थिरता और भरोसा ही चयन की राह आसान बनाते हैं।
यूपी में होमगार्ड बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि इसकी लिखित परीक्षा 100 अंकों की होगी और पूरी तरह सामान्य ज्ञान पर आधारित रहेगी. कुल 100 प्रश्न पूछे जाएंगे और परीक्षा की अवधि 2 घंटे तय की गई है. प्रश्न ऑब्जेक्टिव प्रकार के होंगे.
वी के रॉय सर ने कहा कि होमगार्ड परीक्षा का मूल मंत्र जीके और जीएस है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परीक्षा में यह मायने नहीं रखता कि आपने कितना पढ़ा, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि आपने कितना सेलेक्टेड और उपयोगी पढ़ा है. सही विषयों का चयन और सीमित लेकिन, प्रभावी तैयारी ही सफलता की कुंजी है. उन्होंने यह भी बताया कि इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं है, जो अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी सुविधा है, ऐसे में छात्रों को अधिकतम प्रश्न हल करने की रणनीति अपनानी चाहिए.
इतिहास के सिलेबस को लेकर उन्होंने कहा कि यह काफी विस्तृत है और इसे पढ़ने में 5 महीने तक लग सकते हैं. इसलिए स्मार्ट स्टडी पर जोर देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि अभ्यर्थी करंट अफेयर्स, जनरल साइंस, टेक्नोलॉजी, एनवायरनमेंट साइंस, पॉलिटिकल साइंस और जियोग्राफी विषयों पर विशेष ध्यान दें. खासतौर पर पॉलिटिकल साइंस और जियोग्राफी ऐसे विषय हैं, जिनसे 20 से 30 प्रश्न तक तैयार किए जा सकते हैं।
वहीं, उन्होंने सलाह दी कि जैसे ही कोई टॉपिक पूरा हो, उदाहरण के तौर पर फंडामेंटल राइट्स, तो उस विषय पर कम से कम 50 प्रश्नों का मॉक टेस्ट अवश्य लगाएं. टॉपिक-वाइज मॉक टेस्ट से तैयारी मजबूत होती है और कमजोरियों का पता चलता है. पूरा सिलेबस समाप्त होने के बाद फुल-लेंथ मॉक टेस्ट देना शुरू करें, खासकर जब परीक्षा नजदीक हो.
वी के रॉय सर ने यह भी कहा कि छात्र चाहे ऑफलाइन पढ़ रहे हों या ऑनलाइन, जिस शिक्षक से पढ़ाई कर रहे हैं, उसके कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह समझें और उसी पर भरोसा बनाए रखें. बार-बार शिक्षक बदलना और कोर्स अधूरा छोड़ना सफलता में बाधा बन सकता है. उन्होंने छात्रों से ईमानदारी और निरंतरता के साथ तैयारी करने की अपील की और विश्वास जताया कि मेहनत करने वालों को सफलता देर-सबेर जरूर मिलती है.

