Uttar Pradesh

unique story of this temple devotee forgot God appeared in monkey reminded resolution, ‘पहले मंदिर, फिर घर’.. भक्त भूल गया संकल्प, तो छत पर आ गए 3 बंदर, इस धाम के निर्माण की गजब कहानी

Last Updated:January 10, 2026, 15:21 ISTSultanpur Mandir Story: कहते हैं कि जो संकल्प लिया जाता है, अगर वह नहीं पूरा किया जाए, तो भगवान किसी ना किसी रूप में सामने आकर संकल्प की याद जरूर दिलाते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ सुल्तापुर के एक शख्स के साथ, जिसने मंदिर बनवाने का संकल्प तो लिया, लेकिन निर्माण में देरी करने लगा. इसके बाद भगवान ने कुछ इस तरह संकल्प को याद दिलाया.सुल्तानपुर: भारत धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं वाला देश रहा है. यहां पर कई ऐसी कहानियां प्रचलित मिल जाएंगी, जिस पर विश्वास करना मुश्किल होता है, लेकिन हकीकत देखकर उस पर विश्वास करना ही पड़ता है. एक ऐसी ही कहानी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की है, जहां पर एक परिवार के सदस्य ने यह संकल्प लिया कि जब वह अपना नया घर बनवाएगा, तब वह मंदिर का निर्माण भी करवाएगा, लेकिन उसने यह संकल्प पूरा नहीं किया और मंदिर की बजाय पहले घर का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया.

जब घर बन रहा था, उसी दरमियान हनुमान जी बंदर के रूप में प्रकट हुए और उस व्यक्ति को आभास दिलाया कि पहले उनके मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए और तभी उन्होंने अपने घर के साथ-साथ मंदिर का निर्माण भी कराया और आज 64 योगिनी मंदिर को भव्य रूप दिया. आइए जानते हैं कि इस मंदिर की पूरी कहानी क्या है.

यह है मंदिर का इतिहास मंदिर के संस्थापक श्री नारायण पाण्डेय लोकल 18 से बताते हैं कि इस मंदिर का नाम चौसठ योगिनी मंदिर है. यह सुल्तानपुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुड़वार ब्लाक के भंडरा गांव में स्थित है. इस मंदिर को बनवाने के पीछे की कहानी बड़ी अजब-गजब है. श्री नारायण पांडे बताते हैं कि उनका यह संकल्प था कि जब वह अपना घर बनवाएंगे, तब पहले मंदिर का निर्माण कराएंगे, लेकिन किसी कारणवश वह मंदिर का निर्माण नहीं शुरू करा सके और पहले घर में काम लगवा दिया. उसी दरमियान तीन बंदर उनके घर पर आए और इनको यह संकेत दिया कि मंदिर का निर्माण आवश्यक है. तब इन्होंने घर बनवाने के साथ-साथ मंदिर का निर्माण भी शुरू किया और यह मंदिर बन सका.

दिव्य है यहां की महिमा 64 योगिनी मंदिर हनुमान जी का सुल्तानपुर में एक प्रसिद्ध मंदिर है. यहां पर गांव के लोग दर्शन और पूजन करने के लिए आते हैं और प्रत्येक वर्ष 21 फरवरी को यहां भव्य भंडारा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है. अपनी दिव्य महिमा की वजह से यह मंदिर सुल्तानपुर में प्रसिद्ध है.

बनाई गई अनोखी कलाकृति इस मंदिर की संरक्षक मनीषा पांडे बताती हैं कि इस मंदिर की नक्काशी को नागर शैली में किया गया है और इसमें कलाकृतियां बनाकर इस मंदिर को भव्य और सुसज्जित करने का प्रयास किया गया है. सफेद और पीले रंग में बनाया गया यह मंदिर अपने आप में दिव्य और भव्य है, जहां पर श्रद्धालु दर्शन और पूजन करते हैं.About the Authorआर्यन सेठआर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.Location :Sultanpur,Uttar PradeshFirst Published :January 10, 2026, 14:15 ISThomedharmभक्त भूल गया संकल्प, तो छत पर आ गए 3 बंदर, इस मंदिर निर्माण की गजब कहानीDisclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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