Uttar Pradesh

उखाड़ फेंकोगे नहीं, घर-आंगन में लगाओगे…ये घास मर्दों का सीक्रेट, महिलाओं के लिए टॉनिक – Uttar Pradesh News

बलिया. साधारण सी दिखने वाली इस घास को अक्सर उखाड़ कर फेंक या जला दिया जाता है. लेकिन इसके अद्भुत फायदे अगर आप जान गए, तो यकीन मानिए इसे संजोकर रखेंगे. अनेक बीमारियों में संजीवनी ये घास शरीर के लिए बेहद लाभकारी और गुणकारी है. आसानी से हर जगह मिलने वाली यह घास साधारण नहीं, बल्कि गुणों की खान है. इस घास की खूबियों की आयुर्वेद में खूब तारीफ की गई है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की सात साल अनुभवी (MD और पीएचडी इन मेडिसिन) चिकित्साधिकारी डॉ. प्रियंका सिंह बताती हैं कि दूर्वा एक साधारण और हर जगह पाई जाने वाली घास है, जिसको दूब के नाम से भी जाना जाता है.

डॉ. प्रियंका के अनुसार, अक्सर लोग इसे बेकार समझ कर उखाड़ कर फेंक देते हैं, लेकिन ऐसी गलती कभी न करें. ये आपके लिए बड़े काम की चीज हैं. ये औषधीय गुणों से भरपूर जड़ी-बूटी है. ये घास एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीवायरल, एंटीसेप्टिक, एंटी-वायरल, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-बैक्टीरियल, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फाइबर और पोटैशियम से भरी हुई है. दुर्वा से पाचन तंत्र, त्वचा रोगों, शुगर और मासिक धर्म, सिरदर्द, उल्टी और मूत्र रोग जैसी कई समस्याओं से निजात मिल सकती है.

गिनते रह जाएंगे इसका फायदे

दूर्वा के उपयोग से पाचन क्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है. अपच, गैस और कब्ज से राहत मिलती है. त्वचा रोग में इसके लाभ हैं. इसमें खुजली, जलन और रैशेज जैसी तमाम त्वचा की समस्याओं को दूर करने की अनोखी क्षमता होती हैं. इसकी तासीर भी ठंडी होती है. इस घास में साइनोडोन डेक्टाइलोन नामक यौगिक पाया जाता है, जो शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है. यह घास मासिक धर्म में होने वाले असहनीय दर्द और ज्यादा रक्तस्राव की दशा में रामबाण है.

अगर नाक से खून निकलने की समस्या हो, तो इसके रस को दो बूंद नाक में डालने से काफी लाभ मिलता है. इसको पीसकर आंखों के ऊपर लेप करने से लालिमा दूर होती है. सिरदर्द, उल्टी, मूत्र रोग, पथरी और बवासीर जैसी गंभीर बीमारियों में भी रामबाण है. बवासीर में इसके पंचांग को कूटकर दही के साथ खाएं.

कैसे करें इसका सेवन?बात आती हैं कि दूर्वा का प्रयोग कैसे करें?. इसका रस निकालकर सेवन करने के अलावा पीसकर शरीर में जहां समस्या हो, वहां लेप लगाया जा सकता है. इसका काढ़ा यानी चाय बनाकर पीने से लाभ मिलता है. सुखाकर पाउडर के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. हालांकि यह एक औषधि है, इसलिए बगैर आयुर्वैदिक एक्सपर्ट से सलाह लिए इसका सेवन न करें. किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकता है. उम्र और बीमारी के हिसाब से कितना डोज किस प्रकार से किसको लेना है? ये बात एक चिकित्सक की बता सकता है. इसलिए सावधानी के साथ सेवन करना सेफ होगा.

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