Uttar Pradesh

UGC Bill Dispute: ‘छात्रों के अधिकारों को लेकर भ्रामक प्रयास’, यूजीसी पर मचे घमसान में कूदे भीम आर्मी के सांसद चंद्रशेखर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखी चिट्टी

लखनऊ. देशभर में यूजीसी बिल पर मचे घमासान में भीम आर्मी के फाउंडर और सांसद चंद्रशेखर भी कूद पड़े हैं. उन्होंने इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चिट्टी लिखी है. उन्होंने इस बिल का समर्थन किया और कहा कि इसे यूजीसी के तहत आने वाले संस्थानों के अलावा, अन्य जगहों पर भी लागू करना चाहिए.

सांसद चंद्रशेखर ने एजुकेशन मिनिस्टर को लिखे पत्र मे कहा कि यूजीसी बिल-2026 को लेकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के अधिकारों  को लेकर भ्रामक और संगठित प्रयास किया जा रहा है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है.

उन्होंने लिखा कि इस बिल में उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान अथवा दिव्यांगता के आधार पर समता और समावेशन को सुनिश्चित करना है. ऐसे में इस बिल का भीम आर्मी- आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) समर्थन करती है. यह विनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 एवं 21 की मूल भावना के अनुरूप हैं और उच्च शिक्षा को समानता, गरिमा एवं न्याय का वास्तविक माध्यम बनाने की दिशा में एक आवश्यक एवं सकारात्मक पहल हैं.

अपने पत्र में सांसद चंद्रशेखर लिखते हैं कि, यह अत्यंत चिंताजनक तथ्य है कि वर्तमान में यह भेदभाव-निरोधक व्यवस्था केवल यूजीसी से मान्यता प्राप्त संस्थानों तक सीमित है, जबकि आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, आईआईएम, एम्स, मेडिकल कॉलेज तथा इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे अनेक प्रमुख केंद्रीय एवं स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थान यूजीसी के अधिकार क्षेत्र में न होने के कारण इन प्रावधानों से बाहर हैं. उन्होंने कहा कि यह सब जानते हैं कि संस्थागत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न की सर्वाधिक शिकायतें इन्हीं संस्थानों से सामने आती रही हैं, जहाँ देश का भावी प्रशासनिक, तकनीकी एवं नीतिगत नेतृत्व तैयार होता है.

ऐसे में यह आवश्यक है कि जब तक यूजीसी बिल के प्रावधान केंद्रीय एवं स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थानों में समान रूप से लागू नहीं किए जाते, तब तक वंचित समाज के छात्रों के साथ होने वाला शोषण, अन्याय एवं असमानता खत्म नहीं होगी.उन्होंने शिक्षामंत्री से मांग की कि इस बिल को आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी, आईआईएम, एम्स सहित सभी केंद्रीय एवं स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थानों में भी एक समान रूप से लागू किया जाए, ताकि उच्च शिक्षा वास्तव में सामाजिक न्याय, समता एवं संवैधानिक मूल्यों का सशक्त आधार बन सके.

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