Uttar Pradesh

टमाटर की खेती | कृषि समाचार | टमाटर की खेती से मुनाफा कमाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी |

टमाटर की खेती: फरवरी का अनुकूल मौसम टमाटर की व्यावसायिक खेती के लिए सबसे सुनहरा अवसर है. इस समय न तो कड़ाके की ठंड होती है और न ही झुलसाने वाली गर्मी, जो टमाटर के पौधों के विकास के लिए एकदम सही है. किसान मनोहर सिंह बताते हैं कि यदि इस महीने हाइब्रिड बीजों और आधुनिक विधि का सही तालमेल बिठाया जाए, तो मात्र ₹20 हजार की लागत लगाकर लाखों रुपये का मुनाफा कमाया जा सकता है. गर्मी के महीनों में जब बाजार में टमाटर के दाम आसमान छूते हैं, तब इस अगेती फसल से किसान बंपर कमाई कर सकते हैं. फरवरी का महीना तापमान और मौसम के हिसाब से बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय ना ही वातावरण में अधिक ठंड होती है और ना ही अधिक गर्मी होती है. ऐसे में ये मौसम कुछ फसलों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. किसान इस मौसम में सब्जियों की खेती करके अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. सब्जियों की व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों के लिए फरवरी के महीने में टमाटर की खेती जबरदस्त फायदे का सौदा बन सकती है. गर्मी के महीने में टमाटर की कीमतें आसमान छूने लगते हैं. ऐसे में इस फसल की खेती व्यावसायिक रूप से किसानों के लिए जबरदस्त मुनाफे का सौदा हो सकती है. टमाटर की खेती करने वाले किसान मनोहर सिंह बताते हैं कि यदि सही विधि से फरवरी के माह में टमाटर की रोपाई की जाती है तो अप्रैल तक किसानों को बंपर पैदावार प्राप्त हो सकती है. इस खेती की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बेहद कम लागत में अच्छा मुनाफा दे सकती है, जिससे किसान मात्र 3 महीने में ही लागत के साथ-साथ मुनाफा भी कमा सकते हैं.

टमाटर की खेती करने के लिए सबसे पहले इसकी नर्सरी तैयार करना बेहद आवश्यक होता है. बीज डालने के तकरीबन 20 से 25 दिनों में पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाता है. अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए किसान हाइब्रिड किस्म का चुनाव कर सकते हैं इससे लागत के अनुसार पैदावार कई गुना तक बढ़ जाती है. किसान मनोहर सिंह बताते हैं कि फसल की रोपाई से पहले खेत को अच्छी तरह से तैयार करना बेहद आवश्यक होता है. इसके लिए खेत को तीन से चार बार अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है. वहीं अंतिम जुताई के समय गोबर की खाद का छिड़काव कर सकते हैं. इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसल का उत्पादन अच्छा होता है. आजकल ज्यादातर जगहों पर किसान टमाटर की बेहतर पैदावार प्राप्त करने के लिए बस तार का इस्तेमाल करते हैं. खेतों में बांस को लगाकर तार के सहारे पौधों को ऊपर चढ़ाया जाता है. इस विधि से पौधा 4 से 6 महीने तक फल देते रहते हैं. इसमें पौधे में लगातार फ्लावरिंग और फ्रूटिंग होती रहती है, जिससे किसानों को फायदा मिल सकता है. मनोहर सिंह बताते हैं कि यदि किसान अपने एक बाई के खेत में टमाटर की खेती करते हैं, तो एक सीजन में तकरीबन ₹20 हजार का खर्च आता है. जबकि इससे लाखों रुपए की कमाई की जा सकती है. ऑफ सीजन में जब मार्केट में टमाटर काम होते हैं और डिमांड ज्यादा होती है, उस समय किसान इससे कई गुना तक अधिक कमाई कर सकते हैं.

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