Uttar Pradesh

महाराजगंज से आई यह महिला दूसरों के लिए एक आदर्श बन गई, गरीबी से निकलकर व्यवसाय शुरू करने वाली

महाराजगंज की रंजीता देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी जिंदगी बदल दी

महाराजगंज: एक समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहती थीं और आर्थिक रूप से पुरुषों पर निर्भर थीं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। सरकारी योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों की मदद से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। निचलौल क्षेत्र के इटहिया गांव की रंजीता देवी इसका जीवंत उदाहरण हैं। जिन्होंने अगरबत्ती निर्माण से अपनी अलग पहचान बनाई है।

रंजीता देवी बताती हैं कि पहले उनका जीवन केवल घर और परिवार तक सीमित था। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन की दिशा बदल गई। उन्होंने डेढ़ लाख रुपये का लोन लेकर अगरबत्ती निर्माण का काम शुरू किया। शुरुआत में चुनौतियां थीं। लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। आज वह आत्मनिर्भर होने के साथ आत्मविश्वास से भी भरपूर हैं।

रंजीता देवी अकेले नहीं बल्कि अपने समूह की 10 महिलाओं के साथ मिलकर अगरबत्ती का निर्माण करती हैं। सभी महिलाएं टीम वर्क के साथ उत्पादन करती हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है बल्कि समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है। इटहिया मंदिर के पास उन्होंने अपनी दुकान भी शुरू की है। जहां स्थानीय लोग उनकी बनाई अगरबत्तियां खरीदते हैं। उनके इस प्रयास की क्षेत्र में सराहना हो रही है।

प्रशासन की योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। रंजीता देवी कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें कारोबार की जानकारी, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिली। इससे उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का साहस जुटाया। अब वह अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

इटहिया गांव को उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा टूरिस्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वोकल फॉर लोकल अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले समय में पर्यटन बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों को बड़ा लाभ मिलेगा। रंजीता देवी को उम्मीद है कि इससे उनके कारोबार में भी वृद्धि होगी और गांव की आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

रंजीता देवी की कहानी यह साबित करती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनीं। बदलते समय के साथ ग्रामीण महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं। यह बदलाव समाज के लिए सकारात्मक संकेत है।

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