Uttar Pradesh

ठंड, बारिश या हो पाला! गेहूं की ये 4 पछेती किस्में… हर हाल में देंगी बंपर उत्पादन, जानें खासियत

Last Updated:November 16, 2025, 17:27 ISTWheat Farming Tips : ठंड, बारिश या पाला किसी भी मौसम की मार से बेपरवाह गेहूं की ये 4 पछेती हाई-यील्ड किस्में खेती करने वाले किसानों के लिए सोने पर सुहागा साबित हो रही हैं. देर से बुवाई के बावजूद ये किस्में उत्तम दाने, ज्यादा उत्पादन और बेहतर रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती हैं. किसान गेहूं की इन किस्मों की बुवाई दिसंबर के अंत तक कर सकते हैं, हालांकि नवंबर का दूसरा पखवाड़ा इनके लिए आदर्श माना जाता है. देर से बुवाई के बावजूद, ये किस्में अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती हैं, जिससे उन किसानों को फायदा होता है जो किसी कारण समय पर बुवाई नहीं कर पाते. HD 2851 एक लोकप्रिय किस्म है जो अच्छी उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है. यह विशेष रूप से पीले रस्ट और भूरे रस्ट के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे फसल को इन बीमारियों से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है. इसकी बालियां लंबी और दाने मोटे होते हैं, जो इसे बाजार में अच्छी कीमत दिलाते हैं. यह किस्म विभिन्न प्रकार की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल है. WBW 173 भी एक देर से बोई जाने वाली किस्म है जो अपनी बेहतर उपज और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. यह किस्म सूखे और गर्मी को सहने की क्षमता रखती है, जिससे उन क्षेत्रों के किसानों को लाभ होता है जहां पानी की कमी होती है. इसके दाने चमकदार और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जो इसे पोषण के दृष्टिकोण से भी बेहतर बनाते हैं. यह जल्दी पकने वाली किस्म है. श्री राम सुपर 303 एक लोकप्रिय किस्म है. यह किस्म विभिन्न प्रकार की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करती है और कई प्रमुख बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है. इसके दाने मोटे और वजनदार होते हैं, जिससे प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन मिलता है. यह किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. WH 1124 देर से बोई जाने वाली किस्म है, जो मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच लोकप्रिय है. यह किस्म अच्छे उत्पादन के साथ-साथ रस्ट बीमारियों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता रखती है. इसके दाने मजबूत और चमकदार होते हैं, जो इसे आटे और बेकरी उत्पादों के लिए उपयुक्त बनाते हैं. ये कम दिनों में तैयार हो जाती है. इन देर से बोई जाने वाली किस्मों का चयन करके किसान अपनी उपज में बढ़ोतरी कर सकते हैं और जोखिम को कम कर सकते हैं. ये किस्में प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं, जिससे फसल की विफलता की संभावना कम होती है. इसके अलावा, इनकी रोग प्रतिरोधक लागत को कम करती है, और किसानों अधिक मुनाफा मिलता है.First Published :November 16, 2025, 17:27 ISThomeagricultureठंड, बारिश या हो पाला! गेहूं की ये 4 किस्में… हर हाल में देंगी बंपर उत्पादन

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